
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा के पेपर लीक मामले में CID की जांच ने एक ऐसे नेटवर्क को बेनकाब किया है, जिसके तार झारखंड की सीमाओं को लांघकर देश की राजधानी दिल्ली और नेपाल के काठमांडू तक जुड़े थे। लाखों रुपये लेकर सरकारी नौकरियों का सौदा करने वाले इस शातिर सिंडिकेट ने परीक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए ना सिर्फ प्रश्न पत्र लीक किए, बल्कि अभ्यर्थियों को होटलों और मैरिज हॉल में बंद कर उत्तर रटवाने का एक समानांतर तंत्र खड़ा कर रखा था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े की जड़ें काफी गहरी हैं। JSSC ने परीक्षा संचालन की आधिकारिक जिम्मेदारी ‘वेबेल’ एजेंसी को सौंपी थी। आरोप है कि वेबेल ने आयोग की अनुमति के बिना ही प्रश्न पत्रों की छपाई और वितरण का जिम्मा ‘आईसीएन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ को सौंप दिया। माना जा रहा है कि यहीं से गोपनीयता भंग हुई और पेपर मुख्य सेटर मिथिलेश सिंह के हाथ लग गया। इसके बाद शुरू हुआ नौकरियों की खरीद-फरोख्त का बड़ा खेल, जिसमें हर चरण के लिए अलग-अलग रेट तय किए गए थे। प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने से लेकर परीक्षा केंद्रों के भीतर नकल कराने और उत्तर रटवाने के नाम पर मोटी रकम वसूली गई। CID अब तक इस मामले में दो दर्जन से अधिक दलालों, फर्जी अभ्यर्थियों और एजेंट्स को शिकंजे में लेकर जेल भेज चुकी है।
छह शहरों में बनाए गए थे गुप्त ठिकाने
जांच में यह भी सामने आया है कि लीक हुए पेपर के जरिए अभ्यर्थियों को पढ़ाने के लिए देश के कई हिस्सों में गुप्त ठिकाने या ‘सेफ हाउस’ बनाए गए थे। मुख्य सेटर मिथिलेश सिंह के इस नेटवर्क के बोकारो के दुग्धा, आसनसोल के नियामतपुर स्थित मैरिज हॉल व होटल, पटना, हजारीबाग और धनबाद जैसे छह प्रमुख ठिकाने सक्रिय थे।
जांच का दायरा बढ़ा तो पता चला कि गिरोह के तार देश की सरहद पार नेपाल तक फैले हुए थे। कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को विशेष सुरक्षा और गोपनीयता के नाम पर मुजफ्फरपुर, दिल्ली और नेपाल की राजधानी काठमांडू तक ले जाया गया, जहां होटलों और गुप्त कमरों में उन्हें परीक्षा के जवाब रटवाए गए ताकि वे किसी भी हाल में परीक्षा पास कर सकें।
अगले महीने अदालत में दाखिल होगी पूरक चार्जशीट
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। सीआईडी के हाथ कई ठोस सबूत और कड़ियां लग चुकी हैं, जिनके आधार पर अगले महीने अदालत में एक व्यापक पूरक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी है। इस चार्जशीट में परीक्षा संचालन एजेंसी के लापरवाह और जिम्मेदार अधिकारियों, प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों, गिरोह के दलालों और अनुचित साधनों के दम पर सचिवालय में नौकरी पाने वाले तथाकथित सफल अभ्यर्थियों के नामिल किए जाएंगे। जांच एजेंसी का मकसद इन तमाम सबूतों के जरिए अदालत में ऐसा मजबूत मामला खड़ा करना है, जिससे इस शिक्षा विरोधी सिंडिकेटम शा से जुड़े हर एक चेहरे को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और भविष्य में इस तरह की धांधली की कोई हिम्मत न कर सके।
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