नई दिल्ली : हर वर्ष 26 जुलाई को देश में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इसी दिन कारगिल की ऊंची चोटियों में कब्जा जमाए बैठे पाकिस्तानी सैनिकों को भारतीय सेना के जवानों ने उनकी सीमा के अंदर खदेड़ कर कारगिल हिल पर फिर तिरंगा फहराया था। यह युद्ध भारत व पाकिस्तान के बीच करीब दो महीने तक चला। अंत में भारतीय सेना ने जीत हासिल की थी। कारगिल विजय के बाद हर साल देश में इस जीत की खुशी में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।
इस युद्ध में जीत के लिए भारतीय सेना के कई बहादुर जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। बेहद मुश्किल परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना इस युद्ध को लड़ा। युद्ध में भारत के करीब 527 सैनिक शहीद हुए। पाकिस्तान के 2 हजार से अधिक सैनिक मारे गए। भारतीय सैनिकों के बलिदान का ही परिणाम था कि इस युद्ध में देश जीत सका। ऐसे में अब आप को इस युद्ध व इसके नायकों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।
जानिए कैसे शुरू हुआ कारगिल युद्ध :
जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में हर साल भारी बर्फबारी होती है। इस वजह से पाकिस्तान और भारत की सेनाएं अपनी पोस्ट छोड़कर निचले स्थानों में रहने के लिए चली आती थीं । वर्ष 1999 में भी भारतीय सेना ने कुछ ऐसा ही किया। ठंड शुरू होते ही सेना के जवान कारगिल की ऊंची चोटियों को छोड़कर नीचे आ गए। पाकिस्तानी सेना ने अपनी पोस्ट नहीं छोड़ी। भारतीय सेना के मौजूद नहीं होने का फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी सेना ने भारतीय चोटियों की तरफ चढ़ाई शुरू कर दी। आतंकवादियों को साथ लेकर चुपके से एलओसी पार करके लद्दाख में स्थित करगिल पर कब्जा कर लिया।
ऐसे शुरू हुआ युद्ध :
3 मई 1999 को कारगिल में स्थानीय चरवाहों ने भारतीय सेना को क्षेत्र में जमे पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों के बारे में सचेत किया। तब भारतीय सेना ने इसे खाली कराने के लिए सैनिकों की एक टुकड़ी भेजी। इस दौरान पाकिस्तान की सेना ने 5 मई 1999 को भारत के 5 सैनिकों को मार दिया। इसके बाद भारतीय सेना की ओर से 10 मई 1999 को ‘ऑपरेशन विजय’ की शुरुआत की गयी है। करीब 2 महीने तक चले युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने 20 जून 1999 को टाइगर हिल पर लगातार 11 घंटे तक लड़ाई लड़ने के बाद प्वाइंट 5060 और प्वाइंट 5100 पर दोबारा अपना कब्जा कर लिया।
अमेरिका के दबाव व लगातार सैनिकों की मौत के बाद पाकिस्तान ने सेना को पीछे बुलाया:
कहा जाता है कि इस दौरान पाकिस्तान पर दूसरे देशों का दबाव लगातार बढ़ने लगा। अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने इस युद्ध के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की नवाज शरीफ की मुलाकात के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने 5 जुलाई 1999 को अपने सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश दिया।
पाकिस्तानी सेना के पीछे हटने के बाद भारतीय सेना ने 11 जुलाई 1999 को बटालिक की चोटियों पर भी अपना अधिकार जमा लिया। अंत में 14 जुलाई को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ के सफल होने की घोषणा की। 26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध पूर्ण रूप से समाप्त हो गया। इसी दिन को भारत में कारगिल विजय दिवस के जाता है।
ये रहे कारगिल युद्ध के हमारे कुछ हीरो, जिन्हें मिला पुरस्कार :
कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के कई बहादुर अधिकारी और जवान शहीद हुए। इसमें से कुछ प्रमुख सैनिकों के नाम इस प्रकार हैं।
1. कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा कारगिल युद्ध के हीरो माने जाते हैं। वें 13वीं बटालियन, जम्मू और कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात थे। कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए वे शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
2. योगेन्द्र सिंह यादव:
कारगिल युद्ध के दूसरे हीरो की बात करें तो उनका नाम योगेन्द्र सिंह यादव है। जो ग्रेनेडियर के पद पर तैनात थे। पाकिस्तान के साथ मोर्चा लेते समय योगेन्द्र सिंह के साथ उनके टीम के 2 अधिकारियों, 2 जूनियर कमीशंड अधिकारियों और 21 सैनिक शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र प्रदान किया।
3. मनोज कुमार पांडे:
वीर शहीदों की इस कड़ी में तीसरा नाम मनोज कुमार पांडे का है। जो कारगिल युद्ध के समय 1/11 गोरखा राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात थे। उनकी बहादुरी के चलते भारत ने बटालिक सेक्टर में जौबार टॉप और खालुबार पहाड़ी पर कब्जा किया। मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
4. राइफलमैन संजय कुमार:
राइफलमैन संजय कुमार कारगिल युद्ध के दौरान जम्मू कश्मीर राइफल्स के साथ पोस्टिंग पर थे। उन्हें 4875 प्वाइंट के फ्लेट टॉप एरिया पर कब्जे की जिम्मेदारी दी गयी थी। अपनी जान की परवाह किए बिना वे दुश्मनों के बंकर तक पहुंच गए थे। इसी बीच दुश्मन की एक गोली उन्हें लगी,इसके बाद भी उन्होंने तीन पाकिस्तानी सेना के जवानों को मार गिराया। उनके इस अदम्य साहस के लिए सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र से नवाजा
सेना की मदद के लिए आगे आई वायु सेना, शुरू किया ऑपरेशन श्वेत सागर
कारगिल की ऊंची चोटियों पर बैठे आतंकियों एवं पाकिस्तानी सैनिकों को भगाने में सेना की मदद के लिए वायु सेना 11 मई को आगे आई। सुरक्षा मामलों की समिति (सीसीएस) ने बिना एलओसी पार किए वायु सेना को अपने हेलिकॉप्टरों के इस्तेमाल की इजाजत दी। बाद में यह जरूरत महसूस की गई कि लड़ाई में लड़ाकू विमानों को उतारे बिना काम नहीं बनेगा।
इसके बाद सरकार से सेना ने एयरफोर्स को युद्ध में शामिल करने की अनुमति मांगी। सेना की इस मांग को सरकार ने तुरंत स्वीकार कर लिया लेकिन यह भी कहा गया कि वायु सेना किसी भी सूरत में एलओसी को पार नहीं करेगी। इस प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। इसके बाद वायु सेना ने अपने ऑपरेशन ‘श्वेत सागर’ की शुरुआत की।
ऑपरेशन ‘श्वेत सागर’ अभियान के दौरान वायु सेना ने करीब 50 दिनों में हर तरह की कुल करीब 5000 उड़ानें भरीं। कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों के बीच 20 हजार की फिट की ऊंचाई पर युद्ध अभियान चलाया। कारगिल युद्ध विजय में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

