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Kharmas 2023: हिन्दू धर्म में खरमास में शादी क्यों नहीं की जाती है?

by Rakesh Pandey
Kharmas 2023
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धर्म-ज्ञान डेस्क : Kharmas 2023: ग्रहों का परिवर्तन काफी महत्व रखता है। इसका प्रभाव हर किसी पर पड़ता है। जब ग्रहों के राजा कहे जाने वाले सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो खरमास माना जाता है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो फिर खरमास की समाप्ती मानी जाती है। हिंदू धर्म में खरमास काफी अहम माना जाता है। इस एक महीने के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।

कब है Kharmas 2023?

हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्यदेव इस वर्ष गुरुवार 16 दिसंबर 2023 की दोपहर 3 बजकर 47 मिनट से धनु राशि में प्रवेश करने वाले हैं, जिसके साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी। खरमास पूरे एक महीने रहकर 15 जनवरी, 2024 को खत्म हो जाएगा। खरमास में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और घर बनवाना आदि वर्जित होता है।

खरमास में शादी न करने की क्या है वजह

kharmas 2023

16 दिसंबर यानी शुक्रवार से खरमास शुरू हो रहा है। मान्यताओं के मुताबिक, जब खरमास (Kharmas 2023) में किसी की शादी होती है, तो उसकी शादीशुदा जिंदगी में परेशानी आ सकती है। पारिवारिक कलह बढ़ सकता है और पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव आ सकता है। इ्न्हीं मान्यताओं को देखकर खरमास में शादी करने की मनाही होती है।

विशेष परिस्थितियों में कर सकते हैं कोर्ट मैरेज

वैसे तो खरमास में शादी करने की मनाही है, लेकिन एक खास तरीके की मदद से खरमास में भी शादी की जा सकती है। ज्‍योतिषाचार्यों के अनुसार, खरमास में रीति-रिवाजों से शादी करने की मनाही होती है। जो लोग कोर्ट मैरिज करना चाहते हैं, वे खरमास में भी शादी कर सकते हैं। खरमास (Kharmas 2023) में कानूनी तौर पर विवाह रचाने में कोई समस्‍या नहीं होती है। रीति-रिवाजों से शादी करने के लिए युवाओं को मकर संक्रांति का इंतजार करना होगा। 14 जनवरी 2023 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही यानी कि मकर संक्रांति के बाद से ही शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।

इस माह में ग्रह नक्षत्रों की पृथ्वी से दूरी बढ़ जाती है

Kharmas 2023

चूंकि सूर्य की गति में अंतर आ जाता है, इसी कारण से सूर्य का तेज भी निष्क्रिय हो जाता है। सूर्य को सनातन धर्म और ग्रहों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में सूर्य की कमजोर स्थिति अशुभ मानी जाती है। यही वजह है कि खरमास में किसी भी तरह के मांगलिक कार्य को करना वर्जित माना गया है। इसके अलावा, एक अन्य कारण ये भी है कि इस माह में ग्रह नक्षत्रों की पृथ्वी से दूरी बढ़ जाती है। ग्रह-नक्षत्रों का शुभ कार्यों में आवाहन किया जाता है और उनके उपस्थित होने के कारण ही हर कार्य शुभता और सम्पन्नता के साथ पूरा होता है।

ऐसे में जब ग्रह-नक्षत्र पृथ्वी से दूर हो जाते हैं, तो शुभ कार्यों में उनकी उपस्थिति नहीं हो पाती है।

इस पूरे महीने गौ माता, गुरुदेव और साधुजनों की सेवा करनी चाहिए

खरमास के दौरान कोई भी शुभ काम न करें, तामसिक भोजन न करें, किसी से वाद-विवाद करने से बचें। ज्योतिषियों के अनुसार, खरमास में बेटी या बहू की विदाई करना अशुभ माना जाता है। कारोबार की श्रीगणेश न करें। देवी-देवताओं और पक्षियों के प्रति अप्रिय शब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें। कहते हैं कि भगवान भास्कर की पूजा और उपासना करने से साधक को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु का पूजन करने से समस्त पापों का नाश होता है। साथ ही घर में यश-वैभव का आगमन होता है।

इस पूरे महीने गौ माता, गुरुदेव और साधुजनों की सेवा करनी चाहिए। नियमित रूप से भगवान भास्कर को लाल रंग युक्त जल का अर्ध्य दें और गरीबों को अपने सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करें|

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