

गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आबकारी विभाग ने शराब दुकानों के आवंटन के बाद एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। विभाग को आवंटन से पहले ही फीस से कहीं अधिक आवेदन शुल्क मिल चुका है। शहर और ग्रामीण इलाकों में स्थित 21 दुकानों ने विभाग को लाइसेंस फीस से भी ज्यादा आमदनी करा दी है। इसने साबित कर दिया है कि आबकारी विभाग की नीतियां और प्रबंधन ने लाइसेंस प्रक्रिया में सुधार किया है।

गोरखपुर में स्थित तरकुलहा मार्ग की शराब दुकान के लिए सबसे ज्यादा 190 लोगों ने आवेदन किया था। इस दुकान का लाइसेंस शुल्क 29 लाख 95 हजार रुपये था, जबकि आवेदन शुल्क 40 हजार से लेकर एक लाख रुपये के बीच था। यदि 190 लोगों ने 40 हजार रुपये भी जमा किए, तो विभाग के खाते में 76 लाख रुपये जमा हो गए। इसके अलावा, बिछिया स्थित दुकान के लिए 169 लोगों ने आवेदन किया था। इस दुकान की लाइसेंस फीस 30.65 लाख रुपये थी। यदि इन 169 आवेदकों ने 40 हजार रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से आवेदन शुल्क जमा किया, तो विभाग के खाते में 67.60 लाख रुपये जमा हुए।

इसी तरह, धूसड़ चौराहा स्थित दुकान के लिए 161 लोगों ने आवेदन किया था और सहजनवां स्थित दुकान के लिए 141 लोगों ने आवेदन किया था। सहजनवां की दुकान की फीस 25 लाख 15 हजार रुपये थी, जबकि आवेदन शुल्क 65 हजार रुपये रखा गया था। इन आवेदनों से विभाग को 91 लाख 65 हजार रुपये की आमदनी हुई थी। अन्य क्षेत्रों में भी, जैसे जंगल डुमरी, कालेसर, सिकरीगंज, और चौरी चौरा आदि, 100 से अधिक आवेदकों ने आवेदन करके विभाग के खाते में लाइसेंस फीस से ज्यादा रकम जमा करवाई।

इस तरह, आबकारी विभाग को आवंटन शुल्क से काफी अधिक आमदनी हुई। इसके बाद विभाग ने उन दुकानों के लिए एक नयी योजना बनाई है जिनकी लाइसेंस फीस एक करोड़ रुपये से लेकर पौने छह करोड़ रुपये तक है। इनमें सिविल लाइंस, देवरिया बाइपास, मेडिकल कालेज, सिंघड़िया जैसी दुकानें शामिल हैं जिनके लिए 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये तक का शुल्क रखा गया है। वहीं, फराह रोड, जंगल सिकरी, भटहट, इमलीधारी, और जीतपुर जैसी दुकानों के लिए 5 से 5.5 करोड़ रुपये तक का शुल्क निर्धारित किया गया है। इन दुकानों के आवंटियों को विभाग ने बुधवार तक लाइसेंस शुल्क जमा करने का निर्देश दिया है। यदि निर्धारित समय में शुल्क नहीं जमा होता, तो आवंटन को निरस्त कर दिया जाएगा और फिर से आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी।’
आबकारी विभाग के जिला अधिकारी महेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि ई-लॉटरी प्रक्रिया के बाद सभी आवंटियों को आवश्यक कागजात सौंप दिए गए हैं। विभाग ने यह भी बताया कि इस बार महिलाओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, और करीब 135 महिलाओं को शराब की दुकानों का आवंटन किया गया है। नियमानुसार जिनके नाम पर दुकानों का आवंटन हुआ है, उन्हें ही उन दुकानों को चलाना होगा।
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