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मैं तुमसे डरता हूँ
मैं तुम्हारे प्रेम से डरता हूँ
कहीं उसको पाकर
मैं अहंकारी न हो जाऊं
कहीं मुझमें गुमान न आ जाए
कहीं मैं बदल न जाऊं।
मैं तुम्हें जब भी देखता हूं
मुझे आज़ाद रुह की
झलक नज़र आती है
मैं तुममे अपनी क्रान्ति देखता हूं
मैं तुममे ख़ुद को देखता हूं।
मैं तुम्हारे अल्फ़ाज़ों को
तोड़ना चाहता हूं
उसको पिरोना चाहता हूं
उसको दुनिया की सबसे खूबसूरत
मोहब्बत बनाना चाहता हूं
उसको मैं एक कविता बनाना चाहता हूं।
तुम मेरे लिए परियों की
रानी नहीं हो
ना ही कोई राजकुमारी
तुम मेरे लिए ना ही चांद हो
ना ही कोई ताज
तुम मेरे लिए बस
भगत का इंकलाब
और गांधी की अहिंसा हो
अम्बेडकर की जागरूकता
तो लोहिया का समाजवाद हो
तुम सावित्री बाई सी नारीवादी
तो फूले सा साहस हो।

निखिल सिंह, प्रयागराज
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