Mango Municipal Corporation Election: Jamshedpur : मानगो नगर निगम (Mango Nagar Nigam Election) में दो उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर है। यह दोनों उम्मीदवार बड़ी पाटियों के समर्थन से चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा, (Mango Nagar Nigam chunav) मैदान में कई वोटकटवा (votekatwa candidate) उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं। वोटकटवा उम्मीदवारों का पूरा जोर इस बात पर है कि वह अधिक से अधिक वोट काट लें, ताकि अपने उस आका को मुंह दिखा सकें, जिसके कहने पर इलेक्शन में खड़े हुए हैं। इनका पूरा मकसद अधिक से अधिक वोट काट कर अपने आका के विपक्षी प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाना है। इसके लिए, यह लोग वोट जुटाने में रात दिन एक किए हुए हैं। इन वोटकटवा उम्मीदवारों का भी भौकाल टाइट है।

Mango Election Contest : इन तीन किस्म के प्रत्याशी लड़ रहे चुनाव
चुनाव में अब तीन तरह के लोग खड़े हो रहे हैं। एक किस्म ऐसे उम्मीदवारों की है जो जीतने के लिए खड़े होते हैं। दूसरी किस्म के वो प्रत्याशी हैं, जो राजनीति में उतरने के शौकीन होते हैं और यह सोचते हैं कि इस बार न सही अगली बार तो उनकी किस्मत बदल सकती है। तीसरी किस्म ऐसे उम्मीदवारों की है जो मैदान के बड़े खिलाड़ियों द्वारा खड़े किए जाते हैं।
मानगो नगर निगम के चुनाव में जीतने के लिए खड़े हुए दो ही उम्मीदवार हैं। इनमें से एक चाईबासा के मूल निवासी नेता की पत्नी हैं। दूसरी उम्मीदवार भी एक नेता की पत्नी हैं। इसके अलावा, कुछ उम्मीदवार राजनीति में उतरने के शौक में चुनाव लड़ रहे हैं।
ये हैं तीन वोटकटवा
वहीं तीन वोटकटवा उम्मीदवार हैं। यह उम्मीदवार जीतने के लिए उतरने वाले प्रत्याशियों का वोट काटने के लिए चुनाव मैदान में हैं। इनके बारे में जब भी लोग बात करते हैं तो यही बताते हैं कि कौन कितना वोट काट लेगा। मानगो के रोड नंबर दो के रहने वाले इमरान अंसारी कहते हैं कि अगर ज्यादा वोट नहीं कटा तो मुकाबला दिलचस्प होगा और उनकी पसंद का उम्मीदवार जीत सकता है। मानगो रोड नंबर 14 के रहने वाले वसीम खान कहते हैं कि वोटकटवा की रवायत अब बंद होनी चाहिए। हम इनके चक्कर में कब तक वोट कटवाते रहेंगे। यह वोटकटवा उम्मीदवार हर बार चुनाव खराब करने चले आते हैं। शुरुआत में बड़े-बड़े दावे कर दो-तीन हजार वोट काट ही देते हैं जो चुनाव में भारी उलटफेर का कारण बन जाते हैं। इन वोटकवा उम्मीदवारों को चुनाव से इतना फायदा हो जाता है कि वह अपनी बरसों की सियासी कमाई भी लुटाने में गुरेज नहीं करते। यह उम्मीदवार सोचते हैं कि अभी जो भी फायदा मिले उठा लो बाद में सब कुछ ठीक कर लिया जाएगा।
Jharkhand Municipal Election : इनका भी दिल्ली में डेरा
इनमें, एक उम्मीदवार ने दिल्ली में अपना डेरा जमा रखा है। गाहे-बगाहे वह जमशेदपुर आ जाती हैं। इनका चुनाव प्रचार ओल्ड पुरुलिया रोड और न्यू पुरुलिया रोड तक ही सीमित है। यह उम्मीदवार जीतने के लिए उतरने वाले एक प्रत्याशी पर हर समय हमलावर रहती हैं। यह उन पर परिवारवाद का आरोप लगाती हैं, जबकि खुद परिवारवाद कर रही हैं। इनके पति भी पार्टी के बड़े कद्दावर नेता माने जाते हैं। इनके बारे में जनता का फीडबैक यही है कि लोग इनके बड़बोलेपन की वजह से इन्हें पसंद नहीं कर रहे हैं।
जब यह उस प्रत्याशी के खिलाफ जहर उगलती हैं जिनका वोट काटने के लिए इन्हें मैदान में उतारा गया है, तो जनता कहती है कि आप भी तो दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। नगर निगम चुनाव देख कर यहां आ गई हैं। वैसे, शुरू में चुनाव में इनका रंग जम रहा था, मगर इनके समर्थकों की अराजकता की वजह से अब माहौल फीका पड़ गया है। अब साफ नजर आ रहा है कि यह ज्यादा वोट नहीं काट पाएंगी। पार्टी का वोट काटने के लिए भी एक वोटकटवा उम्मीदवार को खड़ा किया गया है। यह उम्मीदवार भी उसी इलाके में प्रचार कर रहे हैं जहां, उनकी पार्टी का वोट बैंक है। यह भी जीतने वाले उम्मीदवार के नाक में दम किए हुए हैं।
डिमना रोड के वोटकटवा
यह तो हुई एक पार्टी को डैमेज करने वाले वोटकटवा उम्मीदवार की। अब दूसरे जीतने वाले उम्मीदवार का वोट भी काटने के लिए वोटकटवा खड़े किए गए हैं। इनको डिमना रोड और आसपास की बस्तियों में वोट काटने का काम सौंपा गया है। यह वोटकटवा भी जोर- शोर से प्रचार करते हैं। गाहे-बगाहे अपने आका की तारीफ भी कर देते हैं। बताया जा रहा है कि यह वोटकटवा भी एक पार्टी से समर्थन की रेस में थे। समर्थन नहीं मिला तो वोटकटवा बन कर मूल प्रत्याशी को डैमेज करने के लिए मैदान में कूद पड़े। इनका फंडा है न खाएंगे और ना ही खाने देंगे। डिमना रोड की सुभाष कॉलोनी के रहने वाले राकेश कुमार कहते हैं पब्लिक सब समझ रही हैं। हम सब जानते हैं कि कौन उम्मीदवार सीरियसली चुनाव लड़ रहा है और कौन वोट कटवा है। हम सोच समझ कर वोट देंगे।
एक उम्मीदवार ऐसी भी
एक उम्मीदवार ऐसी हैं जिनके दादा बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। चूंकि, राजनीति उनका खानदानी पेशा हो गया। इसलिए वह अपने जड़ से जुड़ी रहने के लिए मैदान में उतर आई हैं। इनका भी प्रचार-प्रसार खूब चल रहा है। इनकी गाड़ियां शहर में घूम रही हैं। वैसे, मानगो नगर निगम के चुनाव में उतरी उम्मीदवारों में यह सबसे अधिक पढ़ी-लिखी उम्मीदवार हैं।
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