रांची : राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत कार्यरत लगभग 5000 क्षेत्रीय कर्मियों के लिए राहत की खबर है। ग्रामीण विकास विभाग ने मानदेय में लगभग 30 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार कर फाइल वित्त विभाग को भेज दी है। वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
03 दिसंबर 2025 को ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की अध्यक्षता में हुई एमसीएसईजीसी बैठक में मानदेय वृद्धि पर सहमति बनी थी। बैठक में ग्रेड-पे आधारित मानदेय संरचना लागू करने के लिए भी अध्ययन कर प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया गया था। लंबे समय से लंबित इस मामले में अब विभागीय स्तर पर पहल तेज हुई है।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में झारखंड में ग्राम रोजगार सेवक को 12,000 रुपये, अकाउंटेंट एवं कंप्यूटर सहायक को 14,200 रुपये, कनीय अभियंता को 19,500 रुपये, सहायक अभियंता को 22,500 रुपये तथा प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (बीपीओ) को 23,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है। प्रस्तावित 30 प्रतिशत वृद्धि लागू होने के बाद इन सभी श्रेणियों के कर्मियों के मानदेय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही मानदेय को अन्य समकक्ष संविदा कर्मियों के अनुरूप करने की दिशा में भी कदम उठाया जा रहा है।
इससे पहले पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री इरफान अंसारी के कार्यकाल में भी वृद्धि पर सिद्धांततः सहमति बनी थी, लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने से मामला अटका रहा। वर्ष 2023-24 में मानदेय वृद्धि और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर कई जिलों में मनरेगा कर्मी हड़ताल पर भी गए थे।
मनरेगा कर्मियों का कहना है कि वर्षों से मानदेय नहीं बढ़ने और कार्यभार बढ़ने के कारण वे आर्थिक दबाव झेल रहे है। डिजिटल मॉनिटरिंग, जियो-टैगिंग, डीबीटी भुगतान, तकनीकी स्वीकृति और लक्ष्य आधारित क्रियान्वयन जैसी अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बावजूद पारिश्रमिक स्थिर था।
अब फाइल वित्त विभाग में लंबित है और स्वीकृति के बाद इसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यदि कैबिनेट से मंजूरी मिलती है तो हजारों मनरेगा कर्मियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
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