Jamshedpur : केंद्र सरकार की कथित मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में गुरुवार को मेडिकल तथा सेल्स प्रतिनिधियों ने अखिल भारतीय हड़ताल के तहत एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया। जिले के करीब 800 मेडिकल और सेल्स प्रतिनिधियों ने जुबली पार्क स्थित डीसी ऑफिस गेट पर धरना-प्रदर्शन कर अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

धरना के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि 21 नवंबर को केंद्र सरकार ने 29 मौजूदा श्रम कानूनों को खत्म कर चार नए लेबर कोड लागू किए। इसके तहत 1976 में बना सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉईज (सेवा शर्त) एक्ट भी निरस्त कर दिया गया। यह कानून मेडिकल और सेल्स प्रतिनिधियों के सेवा शर्तों की सुरक्षा का एकमात्र वैधानिक आधार था। वक्ताओं ने कहा कि जिस कानून की 50वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी थी, उसी को खत्म कर दिया गया।
इससे कर्मचारियों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ा है।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वेज कोड में न्यूनतम मजदूरी की साफ परिभाषा और निर्धारण का ठोस फॉर्मूला नहीं है। फ्लोर लेवल वेज बेहद कम प्रस्तावित है। साथ ही, कार्य अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे तक करने की आशंका जताई गई है। उनका कहना था कि कंपनियां पहले से ही आठ घंटे फील्ड वर्क के बाद ऑनलाइन मीटिंग के जरिए 10-12 घंटे तक काम ले रही हैं।यूनियन नेताओं ने फिक्स्ड टर्म इम्प्लॉयमेंट को असुरक्षित बताते हुए कहा कि तय मियाद खत्म होने के बाद सेवा नवीनीकरण की कोई गारंटी नहीं रहेगी।
इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड के तहत यूनियन बनाना और हड़ताल करना भी मुश्किल हो जाएगा, जो मजदूरों के मौलिक अधिकारों पर चोट है।धरना मंच से सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉईज एक्ट की रक्षा, वैधानिक कार्य प्रणाली की बहाली और अस्पताल जैसे कार्यक्षेत्रों में काम के अधिकार को सुनिश्चित करने की मांग केंद्र सरकार से की गई। राज्य सरकार से 26,910 रुपये न्यूनतम मजदूरी और 8 घंटे कार्य दिवस लागू करने की मांग उठाई गई। साथ ही कंपनियों पर सेल्स टारगेट के नाम पर कथित प्रताड़ना और गैजेट के जरिए निगरानी व ट्रैकिंग बंद करने की मांग भी शामिल रही।
बीएसएसआर यूनियन जमशेदपुर इकाई के जिला अध्यक्ष यशवंत देश मौली ने मजदूर विरोधी नीतियों का विरोध करते हुए श्रमिक हित में नीति निर्माण की मांग की। राज्य सचिव पीयूष गुप्ता ने आर-पार की लड़ाई का आह्वान किया। जिला सचिव विनय कुमार ने चारों श्रम संहिताओं को अस्वीकार्य बताते हुए एकजुटता बनाए रखने की अपील की।अंत में उपायुक्त के माध्यम से केंद्र सरकार के श्रम मंत्री को ज्ञापन भेजा गया और विरोध स्वरूप लेबर कोड की प्रतियां जलाई गईं।

