गंगटोक : हाल ही में एक विश्वविद्यालय ने अपनी छात्राओं के लिए मासिक धर्म के दौरान अवकाश की एक नई नीति लागू की है, जो एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस विश्वविद्यालय ने अपनी महिला छात्राओं को हर महीने एक दिन का अवकाश देने की घोषणा की है, जिससे उन्हें मासिक धर्म के दौरान आराम मिल सके और वे अपनी पढ़ाई में बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकें।

आप सोच रहे होंगे कि यह पहल किस विश्वविद्यालय ने की है? दरअसल, यह नीति सिक्किम विश्वविद्यालय द्वारा लागू की गई है। सिक्किम विश्वविद्यालय ने यह कदम उस समय उठाया जब सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संघ (एसयूएसए) ने पिछले महीने एक प्रतिवेदन दिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार लक्ष्मण शर्मा ने चार दिसंबर को इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
सिक्किम विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने अपनी अधिसूचना में कहा, “कुलपति ने सिक्किम विश्वविद्यालय की छात्राओं/महिलाओं को परीक्षाओं को छोड़कर हर माह एक दिन के अवकाश की अनुमति दी है, जो मासिक धर्म के दौरान लिया जा सकेगा।”
यह फैसला महिलाओं की सेहत और आराम को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे वे मासिक धर्म के दौरान किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना किए बिना अपनी पढ़ाई को बेहतर तरीके से जारी रख सकें।
माना जा रहा है कि यह निर्णय छात्राओं के लिए एक स्वागत योग्य कदम है, खासकर उन विश्वविद्यालयों में जहां छात्राओं के लिए ऐसे फैसलों का अभाव होता है। सिक्किम विश्वविद्यालय ने एक कदम और बढ़कर महिलाओं के लिए एक सशक्त और सहायक वातावरण तैयार किया है।

