जमशेदपुर : नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जमशेदपुर 12-13 दिसंबर 2025 को तीसरे इंडस्ट्री-एकेडेमिया कॉन्क्लेव (आईएसी) 2025 की मेजबानी करेगा। यह दो-दिवसीय आयोजन संस्थान के अनुसंधान एवं परामर्श प्रभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन पद्म पुरस्कार प्राप्त अशोक भगत, एनआईटी निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार तथा अधिष्ठाता (अनुसंधान एवं परामर्श) प्रो. सतीश कुमार करेंगे।
गुरुवार को संस्थान परिसर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कॉन्क्लेव उच्च शिक्षा, उद्योग, अनुसंधान, स्टार्टअप और सार्वजनिक नीति के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर भारत में तकनीकी आत्मनिर्भरता, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देगा। कार्यक्रम का विशेष फोकस एमएसएमई-एकेडेमिया सहयोग पर रहेगा। इसमें छोटे-मध्यम उद्यमों के लिए साझा तकनीकी संसाधन, सहयोगी अनुसंधान, आपूर्ति-श्रृंखला नवाचार तथा आरएंडडी मॉडल पर चर्चा होगी।
एनआईटी जमशेदपुर धातु विज्ञान, डिजिटल परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में अपनी अनुसंधान क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा। साथ ही, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम, संयुक्त प्रयोगशालाएं और नए इंटर्नशिप मॉडल विकसित करने पर विचार-विमर्श होगा। संवाददाता सम्मेलन में रत्नेश मिश्रा सहित संस्थान के कई शिक्षक उपस्थित थे।
राष्ट्रीय सलाहकार नेतृत्व और सहयोग
आईएसी 2025 को एक प्रभावशाली, राष्ट्रीय-स्तर की सलाहकार समिति का समर्थन प्राप्त है। समिति में प्रमुख रूप से आईआईटभ् खड़गपुर, आईआईटी पटना, आईआईटी धनबाद) के अलावा कई एनआईटी के प्रमुख और सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशक, अखिल भारतीय विश्वविद्यालयों के कुलपति, और टाटा स्टील, आरएसबी ग्लोबल एवं एचएलई ग्लास्कॉट के श्री विजय सैनी जैसी कंपनियों के वरिष्ठ कॉर्पोरेट लीडर्स शामिल हैं। आईएसी जमशेदपुर को सार्थक उद्योग-शिक्षा एकीकरण के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय आधार के रूप में स्थापित करने की कॉन्क्लेव की महत्वाकांक्षा को रेखांकित करती है।
उद्योग-प्रायोजित पैनल चर्चा
इसमें एमएसएमई–एकेडेमिया संबंधों को मजबूत करने के लिए नई रणनीतियों पर चर्चा होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र, फंडिंग अवसरों और ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर विशेष सत्र आयोजित होगा।
राष्ट्रीय हैकाथॉन
इसमें पूरे देश के अलग अलग संस्थानों की टीमें भाग लेंगी। इस दौरान स्वास्थ्य, प्रदूषण नियंत्रण, डिजिटल समाधान, शिक्षा सुधार और कृषि तकनीक जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर समस्या-समाधान आधारित प्रतियोगिता होगी। इसमें छात्रों को वास्तविक चुनौतियों पर काम करने, नवाचार प्रस्तुत करने और उद्योग व विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
स्कूल–कॉलेज मॉडल प्रतियोगिता
इसमें में स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों के लिए विशेष मॉडल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है। प्रतिभागी वेस्ट-टू-वेल्थ, इंटरनेट ऑफ थिंग्स के वास्तविक जीवन अनुप्रयोग, और झारखंड की कला एवं शिल्प को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने जैसे विषयों पर कार्यशील मॉडल प्रस्तुत करेंगे। यह प्रतियोगिता तकनीक, पर्यावरण और संस्कृति को एक मंच पर लाने का अनूठा प्रयास है।
महिला मंच में होगी उनकी बात
यह विशेष सत्र में महिला उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नवप्रवर्तकों की प्रेरक यात्रा को उजागर करेगा। कार्यक्रम में पद्मश्री सुधा वर्गीज समेत कई प्रभावशाली महिला नेता शामिल होंगी, जो युवा लड़कियों और महिलाओं को प्रौद्योगिकी, नवाचार और नेतृत्व भूमिकाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी।

