पलामू : ईद के मौके पर पलामू जिले के हुसैनाबाद और हैदरनगर की विभिन्न मस्जिदों में मुसलमानों ने वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ विरोध जताया। समुदाय ने इस विरोध को शांतिपूर्वक व्यक्त करते हुए काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज अदा की। साथ ही, उन्होंने हाथ उठाकर एक स्वर में वक्फ संशोधन बिल को वापस लेने की मांग की।

एकजुटता का संदेश
हैदरनगर की बड़ी मस्जिद में पेश इमाम अहमद अली खान ने ईद की मुबारकबाद देते हुए इस विधेयक के खिलाफ अपनी नाखुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार हमारी धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करने की साजिश कर रही है। खासकर उन जगहों पर, जो मुसलमानों द्वारा सदियों पहले दान की गईं हैं, जैसे मदरसा, मस्जिद, और कब्रिस्तान, सरकार इन पर कब्जा करना चाहती है।
उन्होंने कहा, “हमारी इन जगहों पर धार्मिक कार्य और पढ़ाई होती है, और सरकार इन जगहों का इस्तेमाल अपनी मर्जी से करना चाहती है।” उन्होंने सरकार से अपील की कि वह हमारे धार्मिक कानून में हस्तक्षेप न करे और हमें अपनी धार्मिक आजादी के मुताबिक इन जगहों का उपयोग करने दिया जाए।
वक्फ संशोधन बिल को लेकर उठे सवाल
इमाम अहमद अली खान ने यह भी कहा कि संशोधन बिल से मुसलमानों की आजादी पर असर पड़ेगा, जो अनुचित है। भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी मिलजुल कर प्रेम से रहते आए हैं और यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। जो लोग हमें तोड़ने की साजिश कर रहे हैं, वे खुद टूट जाएंगे। उन्होंने कहा, “सरकार हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को बनाए रखे। ऐसे बिलों से समाज में खटास पैदा होगी।”
कई मस्जिदों में काली पट्टी बांध कर अदा की गई नमाज
पलामू जिले के विभिन्न मस्जिदों में काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की गई। इनमें प्रमुख मस्जिदों में ईद गाह हुसैनाबाद, इस्लामगंज, राजटोली मस्जिद, चिक टोली मस्जिद, हैदरनगर बाजार मस्जिद, करीमनडीह मस्जिद, कबरा खुर्द मस्जिद, तारा मस्जिद, रामबांध मस्जिद, सबनवा मस्जिद, और कोशिया ईदगाह शामिल हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने यह स्पष्ट किया कि वक्फ संशोधन बिल उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर खतरे का संकेत है, और इस बिल को तुरंत वापस ले लेना चाहिए।

