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रघुवर से मिले मुंडा, जमशेदपुर से खूंटी तक निकाले जा रहे निहितार्थ

by The Photon News Desk
Raghuvar meet Munda
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ब्रजेश मिश्र, जमशेदपुर/Raghuvar met Munda: कहते हैं राजनीति संभावनाओं का खेल है। यहां कुछ भी कभी भी हो सकता है, लेकिन कुछ भी यूं ही नहीं होता। हर कदम के मायने-मतलब होते हैं। अगर वक्त चुनाव का हो फिर तो नेता केवल और केवल भविष्य के लाभ हानि का अनुमान लगाकर ही समय खर्च करते हैं। लोकसभा चुनाव की जारी प्रक्रिया के बीच गुरुवार को झारखंड में भगवा ब्रिगेड की राजनीति करते रहे दो दिग्गज नेताओं की मुलाकात राजनीतिक गलियारे में नई चर्चा का विषय बन गई है। अपने चुनाव प्रचार के लिए खूंटी रवाना होने से पहले केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने जमशेदपुर में ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास से उनके घर जाकर मुलाकात की। यह मुलाकात करीब आधे घंटे तक चली।

मुलाकात के बाद अर्जुन मुंडा ने दावा किया कि पर्व-त्योहारों के मौके पर लोगों से मिलने जुलने की सनातनी परंपरा रही है। लंबे समय से ओडिशा के राज्यपाल महोदय से मुलाकात नहीं हुई थी। लिहाजा राज्यपाल महोदय के जमशेदपुर प्रवास की सूचना के बाद मुलाकात के लिए गए थे। अर्जुन मुंडा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी फोटो के साथ साझा की। मुंडा के पोस्ट के करीब एक घंटे बाद रघुवर दास के सोशल मीडिया अकाउंट्स एक्स पर कुछ और तस्वीरों के साथ मुलाकात की जानकारी दी गई। इसके बाद से दोनों नेताओं के मुलाकात को लेकर जमशेदपुर से खूंटी तक के राजनीतिक समीकरणों से जुड़े निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।

 

क्या “अर्जुन” को फिर चाहिए “रघुवर” का सहारा

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा ने खूंटी से 1445 मतों के अंतर से कालीचरण मुंडा को हराकर जीत हासिल की थी। उस समय रघुवर दास प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। विरोधी दलों ने आरोप लगाया कि “रघुवर” के तीर से “अर्जुन” ने चुनावी जंग में जीत हासिल की। विरोधियों ने दावा किया कि पार्टी के प्रदेश की सत्ता में होने का लाभ मिला। हालांकि पूरे विवाद पर तत्कालीन जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने तभी स्थिति स्पष्ट कर करते हुए विरोधियों के सारे तर्कों को खारिज कर दिया था। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर अर्जुन मुंडा और कालीचरण मुंडा आमने-सामने हैं।

परिस्थितियां जरूर बदल गई हैं। प्रदेश में यूपीए गठबंधन की सरकार है। रघुवर दास पड़ोसी राज्य में संवैधानिक पद पर हैं। हालांकि प्रदेश की राजनीति में रघुवर दास का अनुभव और जमीनी पकड़ मजबूत है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में “रघुवर” का तीर भले ही “अर्जुन” को ना मिल सके, लेकिन महाभारत की तर्ज पर गीता के ज्ञान रूपी अनुभव का लाभ जरूर मिल सकता है।

 

क्या “विद्युत” को मिलेगा सबका साथ

भाजपा की ओर से टिकट बंटवारे से पहले जमशेदपुर लोकसभा सीट को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। अलग-अलग दावे किए जा रहे थे। पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के नाम से चर्चित गुटों के बीच जमशेदपुर सीट की दावेदारी का शिगूफा छोड़ा गया था। कहा जा रहा था कि प्रदेश के दो दिग्गज नेताओं में से एक का गुट विद्युत वरण महतो को फिर टिकट दिए जाने के पक्ष में था। जबकि दूसरा गुट प्रत्याशी बदलने का दबाव बना रहा था। अब जबकि पार्टी ने इस सीट से अपना उम्मीदवार तय कर दिया है, ऐसे में भगवा ब्रिगेड के सबसे बड़े धुरंधरों की आपसी मेलजोल विद्युत वरण महतो को बड़ी राहत दे सकती है। रघुवर और अर्जुन की मुलाकात के बाद यह सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या अब “विद्युत” को सबका साथ मिलेगा।

भगवा ब्रिगेड की प्रदेश राजनीति पर हो सकता असर

झारखंड में भाजपा की राजनीति का एक वह दौर था, जब पार्टी के तीन बड़े नेता कोल्हान क्षेत्र से आते थे।इसमें अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और सरयू राय शामिल थे। मौजूदा समय में यह तीनों नेता प्रदेश में पार्टी की राजनीति से दूर अलग-अलग किनारों पर खड़े हैं। प्रदेश की कमान पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के हाथ में है। वर्तमान में भगवा ब्रिगेड के झंडे तले अर्जुन मुंडा केंद्र की राजनीति कर रहे हैं। रघुवर दास ओडिशा में राज्यपाल के पद पर आसीन हैं।

पार्टी छोड़कर जमशेदपुर पूर्वी से विधायक बने सरयू राय अपने नवगठित दल भारतीय जनतंत्र मोर्चा के बैनर तले एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। वह धनबाद से भाजपा के प्रत्याशी ढुल्लू महतो के खिलाफ ताल ठोकने की तैयारी में हैं। वर्तमान में अलग-अलग मोर्चों की कमान संभाल रहे इन तीनों नेताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। तीनों में अपार क्षमता है। इन नेताओं के बीच दूरियां और नजदीकियां हमेशा से झारखंड की राजनीति को प्रभावित करती रही हैं। तीनों नेताओं में से किसी का एक दूसरे की तरफ झुकना अथवा एक दूसरे से लड़ना प्रदेश में राजनीतिक भूकंप पैदा करने में सक्षम है। ऐसे में रघुवर और अर्जुन की मुलाकात में कोई राजनीतिक समीकरण बना तो भगवा ब्रिगेड की प्रदेश राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

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