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Rahul Gandhi : संविधान रक्षा पर बोल रहे थे राहुल गांधी, अचानक बंद हो गया माइक

राहुल गांधी ने संविधान की अहमियत और उसके उद्देश्य पर जोर देते हुए कहा कि यह संविधान अहिंसा का रास्ता दिखाता है और यह सत्य और अहिंसा की किताब है।

by Rakesh Pandey
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नई दिल्ली: तालकटोरा स्टेडियम में मंगलवार को संविधान दिवस की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रम में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम हुआ। जब पार्टी नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय पर अपना संबोधन दे रहे थे, तो अचानक उनका माइक बंद हो गया। हालांकि, राहुल गांधी ने इस अप्रत्याशित घटना का सामना करते हुए कहा कि जितना माइक बंद करना है कर लो, मैं फिर भी बोलूंगा। इसके बाद माइक ठीक हुआ और उन्होंने अपनी बात जारी रखी।

दलितों-पिछड़ो के मुद्दे उठाने पर दबा दी जाती है आवाज- राहुल गांधी


राहुल गांधी ने संविधान की अहमियत और उसके उद्देश्य पर जोर देते हुए कहा कि यह संविधान अहिंसा का रास्ता दिखाता है और यह सत्य और अहिंसा की किताब है। उनका मानना था कि संविधान हिंसा की इजाजत नहीं देता। उन्होंने कहा कि जहां भी हमारी सरकार आएगी, हम वहां जातिगत जनगणना कराएंगे। अगर पिछड़े वर्ग की हिस्सेदारी ज्यादा है तो उनकी भागीदारी कम क्यों है? राहुल ने यह सवाल उठाया कि जब भी दलितों या पिछड़े वर्ग के मुद्दे उठाए जाते हैं, तो क्यों उनकी आवाज को दबा दिया जाता है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि अगर हम भारत की वर्तमान सामाजिक संरचना को देखें तो बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जो समाज के विभिन्न पिछड़े वर्गों से आते हैं, लेकिन उनका प्रतिनिधित्व सही तरीके से नहीं हो पा रहा। उन्होंने इस संदर्भ में समाज के प्रमुख व्यक्तित्वों की बात की, जैसे बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा गांधी, ज्योतिबा फूले और अन्य, जिनकी सोच संविधान में समाहित है। उन्होंने सवाल किया, “क्या इसमें सावरकर जी की आवाज है? क्या इस किताब में कहीं लिखा है कि हिंसा का प्रयोग किया जाना चाहिए या किसी को मारने की बात की गई है?”

कांग्रेस सरकार बनने पर सभी राज्यों में कराई जाएगी जातिगत जनगणना


राहुल गांधी ने संविधान दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया और कहा कि यह संविधान हिंसा के खिलाफ है, और इस किताब में संघर्ष का रास्ता नहीं, बल्कि अहिंसा का रास्ता दिखाया गया है। उन्होंने विशेष रूप से जातिगत जनगणना पर जोर दिया और कहा कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनी तो देश के सभी राज्यों में जातिगत जनगणना कराई जाएगी। इस संदर्भ में उन्होंने तेलंगाना का उदाहरण भी दिया, जहां जातिगत जनगणना का काम पहले ही शुरू हो चुका है।

कुल आबादी में पिछड़े वर्ग की संख्या को लेकर बहुत अस्पष्टता है


राहुल गांधी ने यह भी बताया कि भारत में पिछड़ा वर्ग की संख्या को लेकर बहुत अस्पष्टता है। उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा पिछड़े वर्ग से आता है, जबकि दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों की आबादी मिलाकर यह संख्या और भी बढ़ जाती है। उनका कहना था कि अगर हम इन सभी वर्गों को जोड़ें तो यह करीब 90 प्रतिशत आबादी बनती है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं।

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