RANCHI: राजधानी में सिटी बसों के संचालन को लेकर रांची नगर निगम रेस हुआ था। एक के बाद एक सात बार टेंडर निकालने के बाद एक ऑपरेटर भी फाइनल हुआ था, जिसने रांची में सिटी बस चलाने में इंटरेस्ट दिखाया था। इसके बाद टिकट वेंडिंग के लिए ऑपरेटर की तलाश शुरू की गई थी। लेकिन, सात महीने बीत जाने के बाद भी सिटी बसें फाइलों में दौड़ रही हैं। इसका खामियाजा शहर के लोग भुगत रहे हैं।
दो दर्जन बसों पर ही पूरे शहर का लोड है। इन बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पाकेटमारी और सामान गायब होना आम है। लोगों की भी मजबूरी है कि उनके पास दूसरा कोई आप्शन नहीं है। चूंकि आटो वालों की मनमानी भी कम नहीं है।
चरमरा गई पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था
जानकारी के अनुसार, 15 साल की अवधि पूरी कर चुकी पुरानी बसों को एक साथ सड़कों से हटा दिया गया। इसके बाद से ही शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था चरमरा गई है। बसों की संख्या अचानक कम हो जाने से यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। सुबह और शाम के समय स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब कामकाजी लोग, छात्र और आम लोग बसों में सफर करने को मजबूर होते हैं। लंबी दूरी के लिए उनके पास कोई आप्शन नहीं होता। खड़े-खड़े ही लोग इन बसों में सफर करते है।
अब तक परिचालन की प्रक्रिया पूरी नहीं
निगम स्तर पर सिटी बस सेवा को फिर से व्यवस्थित करने की कवायद काफी पहले शुरू हो चुकी थी। करीब सात महीने पहले ही नगर निगम की ओर से बस ऑपरेटर को फाइनल करने की सूचना मिली थी। इसके बाद टिकट वेंडिंग के लिए एजेंसी की तलाश शुरू हुई। इसके लिए भी निगम ने टेंडर निकाला था। इसके बावजूद अब तक नई सिटी बसों के परिचालन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
हादसे की बनी रहती है आशंका
बसों की कमी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। कई रूटों पर यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है, जबकि कई बार बसें इतनी भरी होती हैं कि लोगों को चढ़ने तक की जगह नहीं मिलती। मजबूरी में यात्रियों को जोखिम भरे हालात में सफर करना पड़ता है। आगे और पीछे के गेट पर लोग लटककर सफर करते है। जिससे हादसों की आशंका भी बनी रहती है।

