
रांची : त्योहारों की रौनक के बीच झारखंड की राजधानी में सड़क पर फैली अराजकता और जाम से निपटने के लिए खुद प्रशासनिक अमला मैदान में उतर गया है। सोमवार को शहर की ट्रैफिक व्यवस्था का जायजा लेने निकले नगर आयुक्त सुशांत गौरव जब खुद ही जाम की चपेट में आ गए, तो ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी गई। महज एक घंटे के भीतर मौके पर पांच बुलडोजर पहुंची और महज दो घंटे के इस विशेष अभियान में 50 से अधिक अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया गया।
एक घंटे के भीतर बुलडोजर एक्शन
सोमवार को नगर आयुक्त सुशांत गौरव शहर की यातायात व्यवस्था परखने के लिए निकले थे, लेकिन डोरंडा बाजार पहुंचते ही उनका काफिला भीषण जाम में फंस गया। सड़क के दोनों ओर फैली दुकानों के कारण रास्ता इतना संकरा हो गया था कि वाहनों का निकलना दूभर हो गया था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्होंने मौके पर ही पुलिस बल और एन्फोर्समेंट अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सड़क को तुरंत खाली कराया जाए।
निर्देश मिलते ही नगर निगम की टीम पूरी तैयारी के साथ एक्शन मोड में आ गई। एक घंटे के भीतर पांच बड़ी जेसीबी और भारी पुलिस बल डोरंडा बाजार पहुंच गया। इसके बाद बिना किसी देरी के सड़क घेरकर बनाई गई स्थायी और अस्थायी दुकानों को तोड़ा जाने लगा। अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से पूरे बाजार में अफरा-तफरी मच गई। करीब दो घंटे तक चले इस बुलडोजर एक्शन में पचास से ज्यादा संरचनाओं को हटाकर सड़क को सुगम बनाने का प्रयास किया गया।
दुकानदारों का छलका दर्द, बोले- त्योहार के लिए रखा था लाखों का सामान
इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय दुकानदारों में भारी नाराजगी देखने को मिली। दुकानदारों का आरोप है कि नगर निगम ने कोई पूर्व नोटिस या चेतावनी नहीं दी। उनके मुताबिक, प्रशासन ने उन्हें सिर्फ 15 मिनट का भी वक्त नहीं दिया ताकि वे अपनी दुकानों में रखा माल सुरक्षित बाहर निकाल सकें।
व्यापारियों का कहना था कि दुर्गापूजा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहारों को देखते हुए उन्होंने भारी मात्रा में सामान मंगाकर दुकानों में रखा था। इस कार्रवाई के कारण उनका लाखों रुपये का माल बर्बाद हो गया है। दुकानदारों ने रोष जताते हुए कहा कि प्रशासन को कम से कम सामान समेटने का उचित अवसर तो देना चाहिए था।
दूसरी ओर, निगम अधिकारियों का तर्क है कि त्योहारों के मद्देनजर शहर में लोगों की आवाजाही सुगम रखना उनकी प्राथमिकता है। अधिकारियों के मुताबिक, डोरंडा बाजार की आधी से अधिक सड़क पर दुकानदारों ने कब्जा कर लिया था। निगम ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले एक साल में इस क्षेत्र में तीन बार अतिक्रमण हटाया जा चुका है, लेकिन कार्रवाई के महज दो दिन बाद लोग फिर से कब्जा जमा लेते हैं। इसी जिद और लापरवाही के कारण इस बार त्योहार से ठीक पहले प्रशासन को यह कठोर कदम उठाना पड़ा।
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