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RANCHI FOOD SAFETY: 12 फूड सेफ्टी ऑफिसर के हाथों में होगी सिटी की कमान, मिलेगा लोगों को हाइजीनिक फूड

रेगुलर चलाया जाएगा चेकिंग अभियान, मिलावट के खिलाफ तेज होगी कार्रवाई

by Vivek Sharma
खाद्य सामग्री की जांच
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RANCHI: रांची में खाद्य सुरक्षा को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब व्यवस्था को मजबूत बनाने की तैयारी हो गई है। जल्द ही राजधानी में 12 फूड सेफ्टी ऑफिसर की तैनाती की जाएगी। विभाग ने इसका रोडमैप तैयार कर लिया है। जिससे शहर में बिकने वाली खाने की चीजों की नियमित जांच और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई तेज की जा सकेगी। अधिकारियों की संख्या बढ़ने से शहर में रेगुलर चेकिंग अभियान चलाने की योजना है, ताकि लोगों को सुरक्षित और हाइजीनिक भोजन उपलब्ध हो सके।

अभी एक अधिकारी के कंधों पर जिम्मेदारी

फिलहाल रांची में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी एक ही फूड सेफ्टी ऑफिसर के कंधों पर है। ऐसे में पूरे शहर की दुकानों, होटल, रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फूड वेंडर्स और छोटे-छोटे स्टॉल्स की मॉनिटरिंग करना काफी मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि खाद्य पदार्थों के सैंपल की नियमित जांच नहीं हो पाती। इसके अलावा लाइसेंस की भी प्रभावी तरीके से चेकिंग नहीं हो रही है।

हर दिन खुल रहे नए फूड स्टॉल

शहर में हर दिन दर्जनों नए खाने के स्टॉल खुल रहे हैं। जहां देखो वहीं दुकानें लग रही है। लेकिन इनमें से कई जगहों पर न तो साफ-सफाई का ध्यान रखा जा रहा है और न ही खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन किया जा रहा है। ऐसे में लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ता जा रहा है। मजबूरी में लोग ऐसी दुकानों में खाना खा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय रहते निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी। मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की समस्या गंभीर बीमारियों को दावत दे सकती है।

केवल त्योहार में फोकस

अभी तक विभाग का फोकस ज्यादातर त्योहारों के दौरान चलाए जाने वाले सैंपल कलेक्शन अभियान पर ही रहता है। इस दौरान खासतौर पर खोवा, पनीर और मिठाइयों की जांच की जाती है। लेकिन अन्य खाद्य पदार्थों, खासकर स्ट्रीट फूड और छोटे दुकानों में बिकने वाले आइटम की जांच लगभग नहीं के बराबर होती है। यही कारण है कि मिलावट की शिकायतें मिलने के बावजूद कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। कई बार चेकिंग की खबर भी पहले फैल जाती है। जिससे टीम को निरीक्षण में कुछ नहीं मिलता।

दुकानों के लाइसेंस की जांच

शहर में लाइसेंस की जांच भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। दुकानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन मैनपावर कमी के कारण सभी दुकानों के लाइसेंस और गुणवत्ता की जांच नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर पड़ रहा है। अब लाइसेंस की जांच भी तेज होगी और खाना भी हाइजीनिक मिलेगा। इसके अलावा मिलावट वाले प्रोडक्शन पर भी रोक लगेगी।

माइक्रोबायोलॉजी लैब बनकर तैयार

नामकुम स्थित कैंपस में फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट का माइक्रोबायोलॉजी लैब बनकर तैयार हो चुका है। जहां पर हाईटेक मशीन इंस्टॉल की गई है। इन मशीनों से जांच करने पर यह पता चल जाएगा कि खाद्य सामग्री में की गई मिलावट से कौन सी बीमारी होने की संभावना है।

क्या कहते हैं अधिकारी

डिस्ट्रिक्ट फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ. पवन कुमार ने बताया कि फिलहाल वह अकेले ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाया जाता है, लेकिन पूरे शहर को कवर करना संभव नहीं है। त्योहारों के समय ज्यादा खपत होने वाली चीजों की जांच पर फोकस किया जाता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की संख्या बढ़ेगी तो नियमित रूप से जांच अभियान चलाना आसान हो जाएगा।

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