RANCHI: गुरुवार को सदर हॉस्पिटल में दो अलग-अलग टीम ने निरीक्षण किया। जिसमें एक टीम यूनिसेफ की थी। वहीं इंस्पेक्शन करने वाली दूसरी टीम दिल्ली से आए हेमेटोलॉजिस्ट्स की। जहां पहले निरीक्षण करने के लिए यूनिसेफ की टीम पहुंची। इस दौरान सिविल सर्जन रांची डॉ प्रभात कुमार भी मौजूद रहे। टीम ने कई विभागों के वार्डों में जाकर व्यवस्था देखी। वहीं पेडियाट्रिक वार्ड के एसएनसीयू की टीम ने तारीफ की। सिविल सर्जन ने बताया कि टीम ने वार्ड के बारे में अच्छा फीडबैक दिया है। टीम ने कहा है कि ऐसा एसएनसीयू वार्ड किसी सरकारी हॉस्पिटल में नहीं है। इससे हमलोगों को और बेहतर करने की प्रेरणा मिली है। साथ ही कहा कि जल्द ही वार्ड में और भी मशीनें लगाई जाएगी। इसके अलावा कुछ मशीनें जो बंद पड़ी है उसे भी चालू कराया जाएगा।

थैलेसीमिया के मरीजों से मिली टीम
डॉ प्रभात ने बताया कि दिल्ली से हेमेटोलॉजिस्ट्स की एक टीम भी सदर पहुंची थी। टीम ने डे केयर व अन्य विभागों में जाकर व्यवस्था देखी। इसके अलावा थैलेसीमिया मरीजों व उनके परिजनों से बात की। इस टीम में कुछ डॉक्टर भी थे। उन्होंने मरीजों से मिलने वाली सुविधाएं और दवाओं के बारे में भी फीडबैक लिया। सिविल सर्जन ने बताया कि एक और हेमेटोलॉजिस्ट सदर के लिए फाइनल हो गया है। उनके आने से विभाग मजबूत होगा। वहीं बोन मैरो ट्रांसप्लांट का साफ हो गया। जल्द ही मरीजों को सदर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलने लगेगी।
देश में बनाई अलग पहचान
आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के सफल क्रियान्वयन में सदर अस्पताल पूरे देश भर में पहले स्थान पर रहा था। सदर अस्पताल ने आयुष्मान भारत योजना का सर्वाधिक लाभ मरीजों को दिलाया है। इतना ही नहीं इससे हॉस्पिटल को कमाई भी हो रही है। बता दें कि सदर अस्पताल ने करोड़ों रुपए क्लेम दर्ज कराकर हजारों मरीजों का इलाज किया है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। अपनी इन्हीं उपलब्धियों को लेकर सदर अस्पताल ने देश भर के मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों में 2019 में राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया था। बताते चलें कि 23 सितंबर 2018 को रांची से ही पीएम मोदी ने विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत की शुरुआत की थी।
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