RANCHI: अल्बर्ट एक्का चौक में रविवार को ट्रांसजेंडर समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया। जिसमें पूर्वी सिंहभूम,पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां,रामगढ़, हजारीबाग और से रांची से समुदाय के लोग शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने आजादी के नारे लगाए। उत्थान समिति के सचिव ने कहा कि लोकसभा में जो बिल पारित हुआ है उसे ट्रांसजेंडर सामुदायिक के अस्तित्व का हनन है। ट्रांसजेंडर समुदाय शुरू से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ता आया है।
उन्होंने कहा कि नालसा जजमेंट 2014 में आया, जिसमें ट्रांसजेंडर समुदाय को तृतीय लिंग का अधिकार दिया। बहुत से अधिकारों के साथ सभी राज्य सरकारों को ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड बनाने को कहा गया। झारखंड में भी 10 साल तक ट्रांसजेंडर वेल्फेयर बोर्ड नहीं बना फिर जा कर उत्थान सीबीओ ने रांची हाईकोर्ट में पीआईएल दर्ज किया तो बोर्ड का गठन किया गया। लेकिन आज भी उस पर कोई काम नहीं हो रहा है।
झारखंड में उत्थान संस्था कर रही काम
सदस्यों ने कहा कि पूरे झारखंड में उत्थान संस्था ही एकमात्र काम कर रही हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय को हर तरह से सहयोग करती है। अगर इस तरह का बिल आयेगा तो समुदाय को बहुत परेशानी होगी। आज तक झारखंड में आश्रय गृह, सामुदायिक भवन यहां तक कि झारखंड सरकार ने 2 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी। लेकिन आज तक ये नहीं हो पाया। कोर्ट का आदेश था कि सबसे पहला मौका या किसी तरह का काम सीबीओ को देना है तो क्यों सरकार ध्यान नहीं देती। यहां तक कि झारखंड एड्स कंट्रोल सोसायटी भी काम नहीं देती है जबकि ट्रांसजेंडर टीआई (ट्रगेट इनवेशन) चलते हैं लेकिन वो भी नहीं देती।
ट्रांसजेंडर समुदाय संस्था के माध्यम से लड़ रही है कि सभी को अधिकार मिले। अगर इस तरह के बिल आते हैं तो समुदाय के लोगों को बहुत समस्याएं होगी। इस बिल में तो ट्रांसपुरुष को हटा दिया गया है जो कि हमारे समुदाय का हिस्सा है। उन्होंने झारखंड सरकार से अपील की कि सरकार हमारे लिए कुछ विशेष सुविधाएं लाए।
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