RANCHI: रांची यूनिवर्सिटी इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है। विश्वविद्यालय की स्थिति लगातार बिगड़ती नजर आ रही है, जिससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों से जुड़े अहम मुद्दों पर असर पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल सीनेट और सिंडिकेट की बैठकों को लेकर उठ रहा है। ये दोनों निकाय विश्वविद्यालय के संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सीनेट में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और छात्र प्रतिनिधि शामिल होते हैं, लेकिन वर्षों से इसकी बैठक आयोजित नहीं की गई है। जबकि यूजीसी के नियमों के अनुसार सिंडिकेट की बैठक हर महीने होनी चाहिए। इस वजह से कई महत्वपूर्ण फैसले लंबित पड़े हैं।
इस मुद्दे पर शिक्षाविद और डीएसपीएमयू के पूर्व कुलपति डॉ एसएन मुंडा ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सिंडिकेट की बैठक नहीं होना छात्र हित और विश्वविद्यालय प्रशासन दोनों के लिए नुकसानदायक है। इससे निर्णय प्रक्रिया बाधित हो रही है। वहीं नीलांबर-पितांबर यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ फिरोज अहमद ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण निकायों की बैठक नहीं होना किसी भी विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। बता दें कि सिंडिकेट की बैठक बुलाने का अधिकार कुलपति के पास होता है। ऐसे में लगातार बैठकें नहीं होना प्रशासनिक निष्क्रियता की ओर इशारा करता है।

