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सावित्रीबाई फुले की जयंती पर बच्चों ने जाना नारी शिक्षा का महत्व, धातकीडीह में लगी विशेष क्लास

सावित्रीबाई फुले ने महाराष्ट्र में लड़कियों के लिए स्कूल खोला, उनके वर्षों के संघर्ष का नतीजा है कि अब सैकड़ों वर्षों बाद लड़कियों को भी लड़कों की तरह पढ़ाई करने के मौके मिल रहे हैं।

by Rajesh Choubey
Savitri Bai Phule anniversary
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घाटशिला : भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उमवि धातकीडीह में शनिवार को विशेष क्लास लगी। क्लास में विद्यालय के बच्चों के साथ साथ जमशेदपुर से लिटिल इप्टा के बच्चे भी विद्यालय पहुंचे। शहरी व ग्रामीण बच्चों का यह समागम बेहद रोचक रहा। भारतीय जननाट्य संघ की अर्पिता ने बच्चों सावित्रीबाई फुले की कहानी विस्तार से सुनाई।

सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं। उन्होंने उस समय महिलाओं की शिक्षा के लिए प्रयास शुरू किया था, जब समाज महिलाओं को शिक्षा देना जरूरी नहीं समझता था। सावित्रीबाई फुले ने महाराष्ट्र में लड़कियों के लिए स्कूल खोला, उनके वर्षों के संघर्ष का नतीजा है कि अब सैकड़ों वर्षों बाद लड़कियों को भी लड़कों की तरह पढ़ाई करने के मौके मिल रहे हैं।

इसके बाद लिटिल इप्टा के बाल रंगकर्मियों ने एक के बाद एक कई हिंदी जनवादी गीतों के माध्यम से पढ़ाई का महत्व बताया। संथाली लिपि ओलचिकी के 100 वर्ष पूरे होने पर संताल और लिटिल इप्टा के बच्चों ने मिलकर कई संथाली गीत गाए। लिटिल इप्टा के बच्चों ने अफ्रीकी लोककथा पर आधारित नाटक भी प्रस्तुत किया।

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