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SEBI प्रमुख माधवी का PAC मीटिंग से इनकार ! क्या उनपर लगे आरोप हैं वजह ? जानें क्या है पूरा मामला…

सेबी का वर्क कल्चर टॉक्सिक है। सेबी चीफ का बैठकों में चिल्लाना-चीखना, डांटना और पब्लिकली अपमानित करना आम बात है। वे अनप्रोफेशनल और बेहद कठोर है।

by Reeta Rai Sagar
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SEBI: सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की अध्यक्ष माधवी पुरी बुच ने अचानक पब्लिक अकाउंट कमेटी (PAC) की मीटिंग में आने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी व्यक्तिगत कारण से आज कमेटी के सामने पेश नहीं हो पाएंगी।

SEBI चीफ पर क्या है आरोप
दरअसल बीते दिनों माधवी पर अमेरिकी फर्म हिंडेनबर्ग ने इल्जाम लगाया है। सेबी चीफ माधवी बुच और उनके पति धवल बुच पर यह आरोप है कि ‘Offshore Entities’ में उनकी हिस्सेदारी है। इसी कंपनियों में अडानी ग्रुप ने भी अपने शेयरों में ही अपने पैसे लगाए हैं और इसी कारण अडानी के शेयरों में भी उछाल आए थे। सेबी अडानी पर लगे कई आरोपों की जांच कर रही है। चूंकि सेबी चीफ की इन कंपनियों में हिस्सेदारी है, इसलिए जांच निष्पक्ष होने में संदेह है।

SEBI का जवाब

इन आरोपों के जवाब में माधवी बुच और धवल बुच ने साझा बयान जारी करते हुए कहा कि जिस निवेश की बात हो रही है, वो साल 2015 में किया गया था, तब माधवी और धवल सिंगापुर में एक प्राइवेट सिटीजन की तरह रह रहे थें। साल 2017 में माधवी सेबी की सदस्य बनीं। नियमों के अनुसार, सदस्य बनने के बाद सारे निवेश के बारे में उन्हें बताया गया था। इसके अलावा भी माधवी बुच पर सेबी के पद पर रहते हुए (2017-22) निजी फायदे के लिए काम करने का आरोप लगाया गया। इसकी सफाई में माधवी बुच ने कहा कि वो फर्म उनके पति द्वारा संचालित की जाती थी, जिसकी जानकारी सेबी को दी गई थी।

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस ने भी प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि माधवी बुच ने आईसीआईसीआई छोड़ने के बाद भी वहीं से कमाई जारी रखी है। इन आरोपों की मानें, तो साल 2017-24 के बीच ICICI, ICICI prudential और employee Stock ownership यानि इसोपी से 16 करोड़ 80 लाख रुपये हासिल किए गए। कांग्रेस ने बुच पर आरोप लगाया कि सेबी की सैलरी से कहीं ज्यादा उन्होंने प्राइवेट बैंको से कमाया है। इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया कि माधवी को सैलरी नहीं बल्कि पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट दिए गए। हांलाकि मामला यहां नहीं थमा और कांग्रेस ने कहा कि यह अमाउंट उनकी सेबी सैलरी से बहुत ज्यादा है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार सेबी की आड़ में कुछ छुपा रही है।

माधवी बुच मीटिंग में चिल्लाती हैः सेबी कर्मचारी

इसके बाद सितंबर में सेबी के 500 कर्मचारियों ने वित्त मंत्रालय को चिट्ठी लिखी, जिसका शीर्षक था- कॉल फॉर रेस्पेक्ट और कहा कि सेबी का वर्क कल्चर टॉक्सिक है। सेबी चीफ का बैठकों में चिल्लाना-चीखना, डांटना और पब्लिकली अपमानित करना आम बात है। वे अनप्रोफेशनल और बेहद कठोर है। इस पर कहा गया कि सेबी के करमचारियों को बाहरी तत्वों द्वारा गुमराह किया जा रहा है।

क्यों SEBI ने पेशी में मांगी थी ‘छूट’
इसी संबंध में उन्हें पीएसी के सवालों का जवाब देना था। लेकिन माधवी पार्लियामेंट्री कमेटी के समक्ष पेश नहीं हुई। इस पर पीएसी के चेयरमैन के सी वेणुगोपाल ने कहा कि चूंकि माधवी ने इस मीटिंग में शामिल होने में असमर्थता जताई है, इसलिए मीटिंग को अगली तारीख तक के लिए टाला जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी माधवी ने पीएसी के सामने पेश होने से ‘छूट’ की मांग की थी। जिसकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। इसके साथ ही यह भी मांग की गई थी कि माधवी के बदले सेबी के अधिकारियों से ही पूछताछ कर ली जाए, लेकिन पैनल ने साफ शब्दों में कहा कि माधवी बुच का पेश होना अनिवार्य है।

वेणुगोपाल ने बताया कि अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने पीएसी के सामने पेश होने पर सहमति जताई, लेकिन 24 अक्तूबर की सुबह 9.30 बजे हमें मैसेज मिला कि किन्हीं पर्सनल कारणों की वजह से माधवी दिल्ली की यात्रा नहीं कर सकती। एक महिला के अनुरोध के कारण हमने मीटिंग स्थगित कर दी।

PAC मीटिंग का एजेंडा
साथ ही पीएसी चेयरमैन ने यह भी बताया कि यदि सेबी अध्यक्षा कमेटी के समक्ष पेश होती, तो उनसे क्या सवाल पूछे जाते। उन्होंने बताया कि आज का एजेंडा, नियामक बोर्ड के कामों का रिव्यू करना था और इसलिए हमने सेबी के अधिकारियों को बुलाया था। इसके अलावा कामकाज का लेखा-जोखा होना था। वित्त मंत्रालय और सेबी के तीन-चार अधिकारियों का लिखित बयान लेना था। इसके अलावा संचार, आईटी मंत्रालय और टेलीकॉम विभाग के अधिकारियों का भी मौखिक बयान लिया जाना शामिल था।

PAC पैनल के सदस्य
पैनल के अध्यक्ष के सी वेणुगोपाल (कांग्रेस), रविशंकर प्रसाद (बीजेपी), निशिकांत दुबे (बीजेपी), के लक्ष्मण (बीजेपी), अनुराग ठाकुर (बीजेपी), जगदंबिका पाल (बीजेपी), सुधांशु त्रिवेदी (बीजेपी), सीएम रमेश (बीजेपी), अपराजिता सारंगी (बीजेपी), अशोक चव्हाण (बीजेपी), तेजस्वी सूर्या (बीजेपी), टीआर बालू (डीएमके), टी शिवा (डीएमके), शक्ति सिंह गोहिल (कांग्रेस), जयप्रकाश (कांग्रेस), सौगत रॉय (टीएमसी), सुखेंदु शेखर रे (टीएमसी), धर्मेंद्र यादव (सपा), मगुंटा श्रीनिवासालु रेड्डी (टीडीपी), वी बालाशौर्य (जनसेना), प्रफुल पटेल (एसीपी)

PAC पैनल में आपसी मतभेद

पैनल के सदस्य निशिकांत दुबे का आरोप है कि वेणुगोपाल अपने पद का दुरुपयोग कर रहे है। उन्होंने 5 अक्तूबर को लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को इस संबंध में चिट्ठी लिखी। चिट्ठी में निशिकांत ने लिखा कि वेणुगोपाल PAC के अधिकार क्षेत्र को दरकिनार कर इकोनॉमी को नुकसान पहुंचाने के लिए ‘टूल किट्’ पार्ट्स की तरह काम कर रहे है। जबकि उनका काम भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रपटों और भारत सरकार के खातों की जांच करना है।

इस पर BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम स्टैंडिंग कमेटी की बैठक की चर्चा बाहर नहीं करते है। हमें दुख है कि पीएसी चेयरमैन वेणुगोपाल ने बाहर आकर बाइट दी और सारी बातें सार्वजनिक कर दी।

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