
Jamshedpur : जमशेदपुर के बेल्डीह क्लब में गुरुवार को दो दिवसीय सर्कॉन 2026–सर्कुलैरिटी कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ हुआ। “इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से वैलोराइजेशन की नई परिकल्पना” थीम पर आयोजित सम्मेलन में उद्योग, शिक्षण संस्थानों, शोध संगठनों और स्टार्टअप्स के विशेषज्ञ सर्कुलर इकोनॉमी और संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में नई तकनीकों और व्यावहारिक समाधानों पर मंथन कर रहे हैं।
सम्मेलन का आयोजन टाटा स्टील ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (आईआईएम), जमशेदपुर चैप्टर, सीएसआईआर-नेशनल मेटलर्जिकल लेबोरेटरी (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर और इंडियन सिरेमिक सोसाइटी के सहयोग से किया है।
उद्घाटन सत्र में पद्म भूषण डॉ. वी.के. सारस्वत, पूर्व सदस्य नीति आयोग, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट, कॉरपोरेट सर्विसेज डी.बी. सुंदरा रामम और एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक डॉ. गौतम सूत्रधार विशिष्ट अतिथि रहे। सत्र की अध्यक्षता टाटा स्टील के आईबीएमडी के एग्जीक्यूटिव-इन-चार्ज दिपंकर दासगुप्ता ने की। उन्होंने सर्कुलैरिटी की आवश्यकता और सम्मेलन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। सम्मेलन के संयोजक भार्गव धवाला ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
डॉ. वी.के. सारस्वत ने जलवायु परिवर्तन और बढ़ते कार्बन फुटप्रिंट से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सर्कुलैरिटी के लिए टिकाऊ तकनीकों और नवाचार आधारित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने संसाधनों के कुशल उपयोग और औद्योगिक प्रक्रियाओं में स्थायी तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
डी.बी. सुंदरा रामम ने संसाधन दक्षता और टिकाऊ औद्योगिक प्रक्रियाओं के प्रति टाटा स्टील की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कोयले और उससे जुड़े बाय-प्रोडक्ट्स, विशेष रूप से ऐश, के 100 प्रतिशत उपयोग पर कंपनी के फोकस की जानकारी दी।
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक डॉ. गौतम सूत्रधार ने क्रिटिकल मेटल्स की बढ़ती राष्ट्रीय मांग का उल्लेख करते हुए रिकवरी, रीयूज और जिम्मेदारीपूर्ण डिस्पोजल के तीन-स्तरीय दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और बढ़ती संसाधन खपत के बीच रिसोर्स एफिशिएंसी, वेस्ट वैलोराइजेशन, इनोवेशन और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
औद्योगिक कचरे के लिए ‘लास्ट माइल’ समाधान पर चर्चा
उद्घाटन सत्र के बाद “द डिफिकल्ट लास्ट माइल ऑफ सर्कुलैरिटी: कैन एवरी इंडस्ट्रियल वेस्ट फाइंड अ होम?” विषय पर पैनल डिस्कशन हुआ। इसका संचालन आईआईएम जमशेदपुर चैप्टर के चेयरमैन डॉ. अतनु रंजन पाल ने किया। चर्चा में ऐसे औद्योगिक कचरे के टिकाऊ उपयोग की चुनौतियों व संभावनाओं पर विचार हुआ, जिनका निपटान अपेक्षाकृत कठिन होता है।
करीब 200 प्रतिभागियों और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी वाले सम्मेलन में औद्योगिक बाय-प्रोडक्ट्स, वेस्ट और सेकेंडरी रिसोर्सेज को नई तकनीकों के माध्यम से उपयोगी और मूल्यवान सामग्री में बदलने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स से लिथियम बैटरी रीसाइक्लिंग तक
सम्मेलन में हेजर्डस वेस्ट मैनेजमेंट और रिसोर्स रिकवरी, भारतीय कोयले में रेयर अर्थ एलिमेंट्स, मिनरल वैल्यू चेन में रिसोर्स एफिशिएंसी, अर्बन माइनिंग, क्रिटिकल मिनरल रिकवरी और प्रदूषण की आर्थिक लागत जैसे विषयों पर प्लेनरी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
दो दिवसीय तकनीकी कार्यक्रम में स्लैग और फ्लाई ऐश का बेहतर उपयोग, क्रिटिकल मेटल रिकवरी, रिफ्रैक्टरी रीसाइक्लिंग, लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग, ई-वेस्ट मैनेजमेंट, अर्बन माइनिंग, कार्बन कैप्चर, सर्कुलर स्टीलमेकिंग व रिसोर्स रिकवरी जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे।
स्टार्टअप्स को भी मिलेगा मंच
सर्कॉन 2026 में “इनोवेशंस फॉर अ सर्कुलर फ्यूचर” स्टार्टअप एलेवेटर पिच का आयोजन भी किया जा रहा है। इसके माध्यम से उभरते स्टार्टअप्स को अपनी नई तकनीक और नवाचार आधारित समाधान विशेषज्ञों और उद्योग जगत के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य उद्योग, एकेडेमिया, रिसर्च संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को मजबूत करना है, ताकि संसाधनों के बेहतर उपयोग, औद्योगिक कचरे के वैलोराइजेशन और टिकाऊ औद्योगिक विकास के लिए ऐसे समाधान विकसित किए जा सकें, जो तकनीकी होने के साथ-साथ व्यावहारिक और आर्थिक रूप से भी उपयोगी हों।

