नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) का प्रावधान माल एवं सेवा कर (GST) अधिनियम और सीमा शुल्क (Custom Duty) कानून पर भी लागू होता है। इसके तहत, व्यक्ति प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने से पहले भी गिरफ्तारी से बचने के लिए जमानत की याचिका दायर कर सकता है। यह निर्णय उन मामलों में अहम साबित होगा जहां आरोपी गिरफ्तारी के डर से जमानत की याचिका दायर करना चाहते हैं, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई है।
उच्चतम न्यायालय का फैसला
प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एमएम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने सीमा शुल्क अधिनियम और जीएसटी अधिनियम में दंड प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 16 मई, 2024 को फैसला सुरक्षित रखा था। इन याचिकाओं में दावा किया गया था कि ये प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और संविधान के अनुरूप नहीं हैं।
अग्रिम जमानत का प्रावधान
फैसला सुनाते हुए प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि सीआरपीसी और बाद में बनाए गए कानूनों के तहत, अग्रिम जमानत जैसे प्रावधान जीएसटी और सीमा शुल्क अधिनियमों पर भी लागू होंगे। अदालत ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति इन अधिनियमों के तहत संभावित गिरफ्तारी का सामना कर रहे हैं, वे गिरफ्तारी से पहले भी जमानत के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं।
मुख्य याचिका और विस्तृत फैसले का इंतजार
यह मामला राधिका अग्रवाल द्वारा 2018 में दायर की गई मुख्य याचिका से संबंधित है। अदालत के विस्तृत फैसले का अभी इंतजार किया जा रहा है, जो आने वाले समय में इन कानूनों के तहत अग्रिम जमानत के आवेदन प्रक्रिया को स्पष्ट करेगा।

