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झारखंड में टैक्स संग्रहण बढ़ा, लेकिन सरकार की नीतियां स्पष्ट नहीं: बाबूलाल मरांडी

राज्य के नागरिकों ने अपने खून-पसीने की कमाई से सरकार को टैक्स दिया, यह उम्मीद करते हुए कि इससे उनके बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा।

by Reeta Rai Sagar
Babulal Marandi
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रांचीः झारखंड के किसानों, मजदूरों और व्यापारियों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार को पिछले वर्ष की तुलना में 1,097 करोड़ रुपये अधिक टैक्स दिया, जो कुल 22,172 करोड़ रुपये तक पहुंचा। यह राशि राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। जिसके जरिए सड़कें, स्कूल, अस्पताल और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाने थे। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने इस धन का सही उपयोग नहीं किया, जिससे राज्य में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का माहौल बन गया है।

माफिया पर नहीं हो रही कार्रवाई

राज्य के नागरिकों ने अपने खून-पसीने की कमाई से सरकार को टैक्स दिया, यह उम्मीद करते हुए कि इससे उनके बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा। लेकिन हालात कुछ और ही हैं। राज्य में बालू और भू-माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। सरकारी धन इन माफियाओं की जेब में जा रहा है। इस तरह का भ्रष्टाचार न केवल राज्य के विकास की गति को धीमा कर रहा है, बल्कि ईमानदार करदाताओं के साथ भी विश्वासघात हो रहा है।

सत्ता का दुरुपयोग कर रही सरकार

सरकार की प्राथमिकता अब जनता की सेवा नहीं, बल्कि सत्ता का दुरुपयोग कर काला धन इकट्ठा करना बन गई है। इसके परिणामस्वरूप झारखंड राज्य विकास के बजाय गरीबी, भ्रष्टाचार और माफियाओं के हाथों में फंसा हुआ प्रतीत हो रहा है। अगर सरकार जल्द अपनी नीतियों में सुधार नहीं करती है तो आने वाले समय में इसका नकारात्मक प्रभाव राज्य के आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी सरकार से यह उम्मीद थी कि वे टैक्स से प्राप्त राशि का सही उपयोग करेंगे।

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