RANCHI: नामकुम प्रखंड के जामचुआ स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में शुक्रवार को ‘उमंग दिवस’ की शुरुआत की गई। एनएचएम के मिशन डायरेक्टर शशि प्रकाश झा ने गुब्बारे उड़ाकर इस कार्यक्रम का औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था जीवन का महत्वपूर्ण दौर होता है। इस समय बच्चों को सही दिशा और मार्गदर्शन मिलना बहुत जरूरी है। अगर सही जानकारी न मिले तो बच्चों का भविष्य बर्बाद हो सकता है। यूनिसेफ के सहयोग से उमंग दिवस का राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मौके पर डॉ मुकेश मिश्रा, डॉ लाल मांझी, डॉ विजय किशोर रजक, डॉ कनिनिका मित्रा, चीफ फील्ड ऑफिसर यूनिसेफ झारखंड, एसबीसी स्पेशलिस्ट यूनिसेफ सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सही जानकारी दे पेरेंट्स
मिशन डायरेक्टर ने कहा कि किशोरावस्था में बच्चों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सही जानकारी दें। साथ ही उन्हें ये बताने की जरूरत है कि क्या सही है क्या गलत। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी पढ़ाई, करियर और जीवन के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसमें बच्चों को अपने दोस्तों के साथ मिलकर अभियान चलाने की जरूरत है।
सहिया करेंगी किशोरों को जागरूक
उन्होंने बताया कि अब महीने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और स्वास्थ्य केंद्रों में ‘उमंग दिवस’ का आयोजन किया जाएगा। जिसमें किशोर-किशोरियों को स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरों को जागरूक करना है। इसमें सहिया लोगों को सही जानकारी देंगी। वहीं स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह भी दी जाएगी।

कम उम्र में शादी नहीं करने की सलाह
मिशन डायरेक्टर ने किशोर-किशोरियों को कम उम्र में शादी के दुष्परिणामों के बारे में भी बताया। उन्होंने ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र में शादी करना कानूनन अपराध है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए सभी को बाल विवाह से दूर रहने और समाज में इसके खिलाफ जागरूकता फैलाने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों से कहा कि इसके खिलाफ आवाज उठाए। इसके लिए अपने पेरेंट्स व आसपास लोगों को समझाए।
नशा करने वाले को गांव से करें बाहर
इसके साथ ही बच्चों को नशे से दूर रहने की सलाह दी गई। उन्हें बताया गया कि नशे की लत व्यक्ति के जीवन को बर्बाद कर सकती है। उन्होंने कहा कि आसपास कोई नशा करता है तो उसे समझाने और इस आदत को छोड़ने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करना चाहिए। अगर कोई नशा नहीं छोड़ता है तो उसे पंचायत से बाहर निकालने का अभियान चलाएं। सभी को इसके लिए एकजुट होना पड़ेगा। अपने परिवार से इसकी शुरुआत करें। अपने दोस्तों के साथ मिलकर अभियान चलाए। नशामुक्त गांव और पंचायतों को पुरस्कृत किया जाएगा।
पॉजिटिव सोच अपनाए बच्चे
उन्होंने बताया कि मानसिक रूप से बीमार का मतलब मेंटल होना नहीं होता। अगर कोई हमेशा गुस्सा होता है तो वह मानसिक रूप से बीमार हो सकता है। कोई भविष्य को लेकर चिंतित रहता है तो वह मानसिक रूप से बीमार है। उन्होंने बताया कि अत्यधिक तनाव, चिंता या गुस्सा मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसलिए किशोर-किशोरियों को पॉजिटिव सोच अपनाने और अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त करने की आदत विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि 4 हजार आंगनबाड़ी केंद्र है। इनकी भी मदद ली जाएगी। साथ ही सहियाओं से कहा कि वे उमंग कार्यक्रम में वैसी महिलाओं को भी बुलाए जिनकी शादी कम उम्र में करा दी गई है। वे बताएगी कि इससे उन्हें क्या परेशानी हुई। शरीर पर इसके क्या दुष्प्रभाव पड़े। इससे भी किशोरियों को सही जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने लोगों से भी जागरूक होने की अपील की।

