रांची। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि आज के समय में प्रबंधन शिक्षा को केवल बोर्डरूम और बैलेंस शीट तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे समाज की वास्तविक जरूरतों और चुनौतियों से जोड़कर आगे बढ़ाना आवश्यक है। वे शनिवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रांची के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने संस्थान के मेधावी छात्रों को मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह में कुल 558 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 26 पीएचडी, 11 एक्जीक्यूटिव पीएचडी और वर्ष 2024-26 बैच के विभिन्न प्रबंधन पाठ्यक्रमों के छात्र शामिल रहे। एमबीए के 251, एमबीए एचआरएम के 62, एमबीए बिजनेस एनालिटिक्स के 50, एक्जीक्यूटिव एमबीए के 50, आईपीएम (बीबीए-एमबीए) के 73 और आईपीएम (बीबीए) के 35 विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई पूरी की।
भावी प्रबंधकों को सामाजिक उत्तरदायित्व को भी प्राथमिकता देनी चाहिए
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहां अकादमिक जीवन में केस स्टडी और विश्लेषणात्मक कौशल महत्वपूर्ण होते हैं, वहीं वास्तविक जीवन में लिए गए निर्णय लोगों की आजीविका, विश्वास और सामाजिक संतुलन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। ऐसे में भावी प्रबंधकों को केवल आर्थिक लाभ तक सीमित न रहकर सामाजिक उत्तरदायित्व को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सफलता को केवल उपलब्धियों के आधार पर न आंकें, बल्कि यह भी देखें कि उन्होंने उन उपलब्धियों को किन मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के साथ हासिल किया है। उन्होंने कहा कि नैतिक नेतृत्व, सत्यनिष्ठा और विश्वास ऐसे स्तंभ हैं जिन पर स्थायी और मजबूत संस्थानों का निर्माण होता है।
केवल मुनाफे के पीछे भागने के बजाय जीवन में उद्देश्य को महत्व देना चाहिए
उपराष्ट्रपति ने युवाओं को शॉर्टकट अपनाने के बजाय चरित्र निर्माण पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल मुनाफे के पीछे भागने के बजाय जीवन में उद्देश्य को महत्व देना चाहिए। उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए युवाओं से इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने ‘थिंक ग्लोबल, एक्ट लोकल’ के सिद्धांत को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक दृष्टिकोण के साथ स्थानीय स्तर पर कार्य करना ही वास्तविक परिवर्तन का मार्ग है। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रभाव तभी सार्थक होगा जब वह समाज के जमीनी स्तर से शुरू होगा।
समारोह में उपस्थित झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे केवल सफल पेशेवर ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक भी बनें।
राज्यपाल ने कहा- आईआईएम रांची ने बनाई हैअपनी विशिष्ट पहचान
राज्यपाल ने कहा कि आईआईएम रांची ने देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यह संस्थान न केवल उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी के विकास में भी अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने संस्थान में स्थापित ‘अटल बिहारी वाजपेयी सेंटर फॉर पॉलिसी, लीडरशिप एंड गवर्नेंस’ और ‘बिरसा मुंडा सेंटर फॉर ट्राइबल अफेयर्स’ की सराहना की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहां चुनौतियां बढ़ रही हैं, वहीं अवसर भी उतने ही व्यापक हैं। ऐसे समय में युवाओं को अपने निर्णयों में पारदर्शिता, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखना चाहिए।
विद्यार्थियों के सामने खुला है संभावनाओं का असीम आकाश
झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि इन विद्यार्थियों के सामने संभावनाओं का असीम आकाश खुला है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये छात्र अपने कार्यों से न केवल अपना, बल्कि संस्थान और राज्य का नाम भी रोशन करेंगे।
मंत्री ने बताया कि 2009 में स्थापना के बाद से आईआईएम रांची ने शिक्षा, नवाचार और नेतृत्व विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने राज्य सरकार की ‘गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत छात्रों को 15 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मात्र 4 प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना से संस्थान के 24 छात्र लगभग 3.21 करोड़ रुपये का लाभ उठा चुके हैं।

उन्होंने ‘झारखंड ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं को समझने और नवाचार करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने सुझाव दिया कि आईआईएम रांची के रूरल इमर्शन प्रोग्राम को इस योजना से जोड़ा जाना चाहिए।
इसके अलावा मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार हर कमिश्नरेट में पांच नए बिजनेस स्कूल स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है, जिसमें आईआईएम रांची मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इससे पहले उपराष्ट्रपति ने खूंटी जिले के उलिहातू गांव का दौरा कर भगवान बिरसा मुंडा के जन्मस्थान पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गांव में उनके वंशजों से मुलाकात भी की और अपने पुराने अनुभवों को साझा किया। रांची स्थित बिरसा चौक पर भी उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
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