पटना: राजधानी पटना में निगरानी विभाग ने पुलिस विभाग के दो दारोगा को रंगे हाथ घूस लेते हुए गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है। दोनों दारोगाओं को पीड़ित से घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है और अब यह मामला सुर्खियों में है।
पुनाइचाक में घूस लेते गिरफ्तार हुए दारोगा
निगरानी विभाग की टीम ने यह कार्रवाई गुरुवार शाम को पटना के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र स्थित पुनाइचाक में की। यहां दोनों सब इंस्पेक्टर पीड़ित से एक केस मैनेज करने के बदले घूस ले रहे थे। जैसे ही निगरानी विभाग को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत धावा बोलकर दोनों दारोगाओं को रंगे हाथ पकड़ लिया।
केस मैनेज के नाम पर घूस की मांग
निगरानी विभाग के अनुसार, एक पीड़ित ने बुधवार को शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि उस पर एक व्यक्ति ने रुपये लेने का आरोप लगाते हुए रूपसपुर थाना में केस दर्ज कराया था। इस केस को मैनेज करने के लिए इन दारोगाओं ने पीड़ित से घूस की मांग की थी। मामले की जांच में शिकायत सही पाई गई, और फिर निगरानी विभाग ने छापेमारी की।
50 हजार रुपये की घूस की डिमांड
गिरफ्तार किए गए दोनों सब इंस्पेक्टर रंजीत कुमार और फिरदौस आलम रूपसपुर थाना में कार्यरत थे। वे लोकनायक जयप्रकाश नारायण भवन के पास पीड़ित से 50 हजार रुपये ले रहे थे, जब निगरानी विभाग ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए निगरानी टीम ने तुरंत दोनों आरोपी दारोगाओं को गिरफ्तार कर लिया। अब उन्हें शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां उनसे संबंधित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निगरानी विभाग की लगातार कार्रवाई
हाल के दिनों में निगरानी विभाग भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठा रहा है। यह गिरफ्तारी एक और उदाहरण है, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की गई है। इससे पहले भी निगरानी विभाग ने अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। हाल ही में जिला शिक्षा पदाधिकारी के खिलाफ भी जांच की गई थी, जिसमें उनके पास से करोड़ों रुपये के आभूषण, भूमि के कागजात और भारी मात्रा में नगद रकम बरामद की गई थी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत संदेश
पटना में हुई यह गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि निगरानी विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और भी तेज कर रहा है। इस तरह की कार्रवाई से यह साफ संदेश जाता है कि सरकारी कर्मचारी और अधिकारी अगर कानून की सीमा का उल्लंघन करेंगे और घूसखोरी में शामिल होंगे, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निगरानी विभाग का यह कदम अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक चेतावनी साबित हो सकता है।

