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ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ क्यों मनाया जाता है? जानें महत्व और थीम

by Rakesh Pandey
ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ क्यों मनाया जाता है
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नई दिल्ली: दुनियाभर में होने वाली मौत का एक प्रमुख कारण ब्रेस्ट कैंसर है। कैंसर कई प्रकार के होते हैं। इसमें से एक ब्रेस्ट कैंसर भी है, जिसके मामले महिलाओं में अधिक देखने को मिलते हैं। दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है।

ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ क्यों मनाया जाता है ?

ब्रेस्ट कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल अक्टूबर के महीने को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है। अगर ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो इसका इलाज संभव हो सकता है। हालांकि, गंभीर स्थिति में ब्रेस्ट कैंसर जानलेवा भी हो सकता है। ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ का उद्देश्य स्तन कैंसर से पीड़ित लोगों की सहायता करना और उनकी हिम्मत बनना है। लोगों को ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम के बारे में जानकारी प्रदान करना। नियमित रूप से हेल्थ चेकअप करवाते रहना, ताकि कैंसर का निदान समय पर किया जा सके। लोगों को ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूक करना और इसके लक्षणों को नजरअंदाज न करना।

1985 में इसकी हुई थी शुरुआत
आपको बता दें कि नेशनल ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ की शुरुआत 1985 में हुई थी। लोगों को स्तन कैंसर को लेकर जागरूक करने के उद्देश्य से इसकी शुरुआत की गई। साथ ही, शीघ्र पता लगाने और पीड़ित लोगों का हौसला बढ़ाना भी इस मंथ का प्रमुख उद्देश्य है।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण: स्तन में गांठ और उभार होना, स्तनों की त्वचा का रंग लाल होना, स्तनों के भाग में सूजन आना, स्तनों के आस-पास दर्द महसूस होना।

सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करने की दी जाती है सलाह
20 साल से ज्यादा उम्र वाली महिलाओं को हर महीने खुद ही स्तन को टेस्ट करना चाहिए। महिलाओं को उनके पीरियड्स के 2 से 5 दिन बाद सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि पीरियड्स के दौरान स्तन संवेदनशील रहते हैं और इस समय इनमें दर्द या सूजन होना सामान्य बात होती है। जिन महिलाओं को पीरियड्स नहीं आते, वे महीने का एक दिन चुनकर हर महीने उसी दिन अपने स्तन को टेस्ट कर सकती हैं।

खुद से कर सकती हैं टेस्ट
स्वयं स्तन टेस्ट करना बहुत ही आसान है और इसे बिना किसी व्यक्ति की सहायता लिए किया जा सकता है। स्वयं स्तन जांचने के लिए सबसे पहले आप किसी शीशे के सामने शरीर के ऊपरी भाग के वस्त्र उतारकर खड़े हो जाइए और अपने दोनों हाथों को कमर पर रख लीजिए। ऐसी स्थिति में आपको शीशे में देखते हुए अपने स्तनों की जांच करनी चाहिए।

इस दौरान आप स्तनों के रंग, आकर या स्थिति में हुए बदलावों की अच्छे से जांच करें और यह भी सुनिश्चित करें कि आपके स्तनों पर कोई गांठ, पपड़ी या गड्ढा ना हो। यही काम फिर आपने दोनों हाथों को सिर के पीछे रखने के बाद करना है। इसके साथ-साथ आप यह भी जांच लें कि कहीं आपके निप्पलों से किसी भी प्रकार का कोई डिस्चार्ज तो नहीं हो रहा है।

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