जमशेदपुर/Forest Rights Conference: माझी पारगाना माहाल, घाटशिला और झारखंड नवनिर्माण अभियान के संयुक्त तत्वाधान में रविवार को एक दिवासीय वन अधिकार सम्मेलन सिदो कान्हू हुलगारिया मैदान, कीताडीह में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन की अध्यक्षता माझी पारगाना माहाल घाटशिला प्रखंड के अध्यक्ष सह देश विचार सचिव बहादुर सोरेन ने की।

वक्ताओं ने कहा कि मानव और हाथियों के बीच टकराव का मुख्य कारण वन विभाग भ्रष्टाचार का है। योजना बनाकर लूट ही उनका उद्देश्य है। वन और वन्यजीव से कोई सरोकार दिखाई नहीं देता है।
केंद सरकार वन संरक्षण संशोधन अधिनियम-2023 से ग्राम सभा के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश की गयी है।
वक्ताओं ने कहा कि घाटशिला अनुमंडल में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार का एक भी पट्टा आवंटन नहीं किया गया है। अंचल अधिकारी और वन विभाग कानून का घोर उल्लंघन कर रहा है। अधिकांश दावा को गैरकानूनी तरीके से लंबित और नामंजूर किया गया है। वास्तविक दखल से भी कटौती करते हुए दया स्वरूप केवल नाम मात्र के लिए पट्टा दिया गया है।स्थानीय प्रशासन के निकम्मेपन की वजह से अबुवा वीर दिशोम अभियान केवल फाइलों तक ही सीमित रह गया है। ऐसे अफसरों को चिह्नित करते हुए उनके विरुद्ध जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
सम्मेलन में प्रस्ताव लिया गया कि व्यक्तिगत, सामुदायिक तथा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार का पट्टा के लिए सघन रूप से अभियान चलाया जाएगा। पूर्व में किए गए दावा जो लंबित है, गैरकानूनी तरीके से रद्द किए गए या कटौती की गई है। ऐसे मुद्दों को लेकर शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासनिक पदाधिकारी से मुलाकात करेगा।
सम्मेलन का प्रारंभ सिदो,कान्हू की मूर्ति पर माल्यार्पण से हुआ। इस मौके पर आरटीआई कार्यकर्ता मुकेश कर्माकर, माझी बाबा मेघराइ सोरेन, दीपक रंजीत, दिलीप कुमार महतो आदि ने अपने विचार रखे। संचालन माझी पारगाना माहाल के पूर्व जिला महासचिव सुधीर कुमार सोरेन ने किया।
इस अवसर पर झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता सह ग्रीनमैन ने कहा कि पर्यावरण, जंगल का संरक्षण, संवर्धन, प्रबंधन के साथ ही वन्य जीव, जैव विविधता,प्राकृतिक संसाधन के संरक्षण के लिए लड़ कर लेंगे। हमारे जंगल पर हमारा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि ग्राम सभा का अधिकार अनुमंडल पदाधिकारी की समकक्ष है, परंतु व्यवहार में ग्राम सभा को पंगु बना दिया गया है।
इस अवसर पर जयपाल मुर्मू, चरण हांसदा, सुकलाल सोरेन, दशरथ हेम्ब्रम, दामू प्रामाणिक, मोहम्मद गुलाम, त्रिलोचन सिंह, माधो हांसदा, मालती मुर्मू, कुजरी हायबुरू, सुकदेव महतो, संतोष महतो, चंद्रमोहन महतो, रायसेन सोरेन, लक्ष्मी टुडू आदि उपस्थित थे।

