Home » क्या हैं तिरुपति बालाजी की कहानी …, भक्त यहां पर क्यों कटवाते हैं अपने बाल

क्या हैं तिरुपति बालाजी की कहानी …, भक्त यहां पर क्यों कटवाते हैं अपने बाल

by Rakesh Pandey
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

आंध्र प्रदेश: तिरुपति बालाजी का विश्व प्रसिद्ध आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति के पास तिरूमाला पहाड़ी पर स्थित है, जहां पर भगवान श्रीहरि विष्णु की वेंकटेश्वर के रूप में पूजा होती है। भगवान श्री वेंकटेश्वर अपनी पत्नी पद्मावती (लक्ष्मी माता) के साथ तिरुमला में निवास करते हैं। आओ जानते बालाजी की कहानी और भक्त क्यों देते हैं यहां पर अपने बालों का दान।

तिरुपति बालाजी की कहानी

तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़ी हमें दो कथाएं मिलती है। पहली कथा उनके वराह अवतार से जुड़ी है और दूसरी कथा माता लक्ष्मी और उनके वेंकटेश्‍वर रूप से जुड़ी हुई है।

आदि काल में धरती पर जल ही जल हो गया था। यानी पैर रखने के लिए कोई जमीन नहीं बची थी। कहते हैं कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पवन देव ने भारी अग्नि को रोकने के लिए उग्र रूप से उड़ान भरी जिससे बादल फट गए और बहुत बारिश हुई और धरती जलमग्न हो गई। धरती पर पुन: जीवन का संचार करने के लिए श्रीहरि विष्णु ने तब आदि वराह अवतार लिया।

उन्होंने अपने इस अवतार में जल के भीतर की धरती को ऊपर तक अपने तुस्क का उपयोग करके खींच लिया। इसके बाद पुन: ब्रह्मा के योगबल से लोग रहने लगे और आदि वराह ने तब बाद में ब्रह्मा के अनुरोध पर एक रचना का रूप धारण किया और अपने बेहतर आधे (4 हाथों वाले भूदेवी) के साथ कृदचला विमना पर निवास किया और लोगों को ध्यान योग और कर्म योग जैसे ज्ञान और वरदान देने का फैसला किया।

परंतु श्रीहरि विष्णु की छाती पर लात मारने के कारण माता लक्ष्मी क्रोधित हो गई। उन्हें अपने पति का अपमान सहन नहीं हुआ और वे चाहती थीं कि भगवान विष्णु ऋषि भृगु को दंडित करें, परंतु ऐसा नहीं हुआ।परिणामस्वरूप उन्होंने वैकुंठ को छोड़ दिया और तपस्या करने के लिए धरती पर आ गई और करवीरापुरा (कोल्हापुर) में ध्यान करना शुरू कर दिया।

इधर, विष्णुजी के इस बात से दु:खी थे कि माता लक्ष्मी उन्हें छोड़कर चली गई। कुछ समय बाद वे भी धरती पर आकर माता लक्ष्मी को ढूंढने लगे। जंगल और पहाड़ियों पर भटकने के बाद भी वह माता को खोज नहीं पाए। आखिर परेशान होकर विष्णु जी वेंकटाद्री पर्वत में एक चींटी के आश्रय में विश्राम करने लगे। यह देखकर ब्रह्माजी के उनकी सहायता करने के फैसला किया। वे गाय और बछड़े का रूप धारण कर माला लक्ष्मी के पास गए।

तिरुपति बालाजी में बाल क्यों काटते हैं?

बाल दान दने के पीछे का कारण यह माना जाता है कि भगवान वेंकटेश्वर कुबेर से लिए गए ऋण को चुकाते हैं। कथा अनुसार जब भगवान वेंकटेश्वर का पद्मावती से विवाह हुआ था। तब एक परंपरा के अनुसार वर को शादी से पहले कन्या के परिवार को एक तरह का शुल्क देना होता था, लेकिन भगवान वेंकटेश्वर ये शुल्क देने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने कुबेर देवता से ऋण लेकर पद्मावती से विवाह किया और वचन दिया कि कलयुग के अंत तक वे कुबेर का सारा ऋण चुका देंगे।

उन्होंने देवी लक्ष्मी की ओर से भी वचन देते हुए कहा कि जो भी भक्त उनका ऋण लौटाने में उनकी मदद करेंगे देवी लक्ष्मी उन्हें उसका दस गुना ज्यादा धन देंगी। इस कारण तिरुपति जाने वाले विष्णु भगवान पर आस्था रखने वाले भक्त बालों का दान कर भगवान विष्णु का ऋण चुकाने में उनकी मदद करते हैं।

Related Articles