Jamshedpur : झारखंड में आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसके साथ ही सियासी बहस भी गरमा गई है। देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना कराए जाने के एलान ने जहां एक ओर इसे आधुनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसके तौर-तरीकों और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।
दो चरणों में होगी जनगणना, जानकारी देना जरूरी
देशभर में जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी और इसमें भाग लेना हर नागरिक के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। जनगणना के दौरान गलत जानकारी देने या जानकारी छिपाने पर तीन साल तक की सजा या एक हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
इस प्रक्रिया के तहत नागरिकों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें घर की मूलभूत सुविधाओं जैसे पानी का स्रोत, शौचालय, बिजली, रसोई ईंधन, कचरा निकासी, स्नानघर और रसोई व्यवस्था की जानकारी शामिल होगी। साथ ही इंटरनेट, स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टीवी और वाहनों जैसी डिजिटल और भौतिक संपत्तियों का भी विवरण लिया जाएगा। इससे राज्य के शहरी और ग्रामीण विकास की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
कब कितनी थी झारखंड की जनसंख्या वृद्धि दर
आंकड़ों के अनुसार, 2001 से 2011 के बीच झारखंड की जनसंख्या वृद्धि दर 22.42 प्रतिशत रही। वर्ष 2011 की जनगणना में राज्य की कुल आबादी 3.29 करोड़ दर्ज की गई थी, जबकि 2001 में यह 2.69 करोड़ थी। इस अवधि में राज्य की आबादी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, हालांकि वृद्धि दर पिछले दशक की तुलना में थोड़ी कम रही।
पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी पूरी प्रक्रिया
झारखंड में स्व-गणना की प्रक्रिया एक मई से 15 मई तक चलेगी, जबकि 16 मई से 14 जून तक हाउस लिस्टिंग का कार्य किया जाएगा। पूर्ण जनगणना 2027 में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरी की जाएगी।
प्रगणक इस बार मोबाइल ऐप के जरिए सीधे डेटा एकत्र करेंगे। वहीं नागरिकों को भी स्व-गणना का विकल्प दिया गया है, जिसके तहत वे पोर्टल पर लॉग-इन कर स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे। सफल पंजीकरण के बाद उन्हें एक विशेष आईडी (SE ID) दी जाएगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करना होगा। यह सुविधा हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होगी।
डिजिटल जनगणना पर सियासत
डिजिटल जनगणना को लेकर राज्य में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे पारदर्शी और तेज प्रक्रिया बताते हुए इसका समर्थन किया है। पार्टी का कहना है कि डिजिटल प्रणाली से गड़बड़ी की संभावना कम होगी।
वहीं, कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष रईस रिज़वी छब्बन ने इस पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार डिजिटल प्रक्रिया के नाम पर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
इधर, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक बार फिर जनगणना में सरना धर्म कोड शामिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। पार्टी का कहना है कि लंबे समय से आदिवासी समुदाय इस मांग को उठा रहा है, लेकिन इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। झामुमो नेताओं के अनुसार, इस मुद्दे का असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।
16 साल बाद हो रही जनगणना, बढ़ी उम्मीदें
करीब 16 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही इस जनगणना पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। झारखंड सरकार ने भी अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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