जमशेदपुर : महिला विश्वविद्यालय इन दिनों गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय संकट से जूझ रहा है। प्रभारी कुलसचिव डॉ. सलोमी कुजूर 13 मई से लगभग एक महीने के अवकाश पर हैं, जिससे विश्वविद्यालय के कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो गए हैं। उनके अवकाश पर जाने के बाद प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय प्रक्रियाओं में ठहराव आ गया है।
परिणामस्वरूप शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन लंबित है, मेस वेंडरों का भुगतान अटका हुआ है और विभिन्न विभागों की फाइलें कार्यालयों में लंबित पड़ी हैं। मिली जानकारी के अनुसार डॉ. कुजूर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन कुलपति की ओर से इसे अभी तक स्वीकार्य नहीं किया गया है। लेकिन उनके अनुपस्थिति तक कुलपति ने डॉ. अन्नपूर्णा झा को प्रभारी कुलसचिव का दायित्व सौंपा है, लेकिन उन्हें वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए हैं। इससे भुगतान और स्वीकृति से जुड़ी फाइलें अटकी हुई हैं। गौरतलब है कि डॉ. कुजूर स्वयं अक्टूबर 2025 से प्रभारी कुलसचिव के रूप में कार्यरत थीं। ऐसे में अब “प्रभारी के स्थान पर प्रभारी” व्यवस्था को लेकर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक अनिश्चितता और चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वेतन भुगतान पर गहराया संकट
रजिस्ट्रार कार्यालय में वित्तीय अनुमोदन लंबित रहने से विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन भुगतान प्रभावित हो गया है। इस स्थिति से स्थायी, वोकेशनल, संविदा तथा आउटसोर्स श्रेणी के कर्मचारी प्रभावित हैं। समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों में आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है और असंतोष बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन से जुड़ी फाइलें लगातार एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूम रही हैं, लेकिन अंतिम निर्णय लेने के लिए कोई अधिकृत अधिकारी उपलब्ध नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण समस्या और गंभीर हो गई है।
मेस भुगतान रुका, छात्रावास व्यवस्था पर मंडराया संकट
विश्वविद्यालय के छात्रावासों में भोजन व्यवस्था संचालित करने वाले मेस वेंडरों का भुगतान लंबित होने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। वेंडरों का कहना है कि लगातार बकाया बढ़ने के कारण खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो वे नियमित आपूर्ति जारी रखना मुश्किल समझेंगे। भुगतान में देरी जारी रही तो छात्रावासों की भोजन व्यवस्था बाधित हो सकती है। इसका सीधा असर छात्राओं पर पड़ेगा और उन्हें दैनिक भोजन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
वर्षों से प्रभारी व्यवस्था के सहारे चल रहा विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार मौजूदा प्रशासनिक संकट का एक प्रमुख कारण स्थायी कुलसचिव की नियुक्ति का लंबित रहना है। कॉलेज से विश्वविद्यालय में उन्नयन के बाद से अब तक नियमित कुलसचिव की नियुक्ति झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन के के माध्यम से नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में जेपीएससी ने एक नियमित कुलसचिव का चयन भी किया था, लेकिन उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया। इसके बाद से विश्वविद्यालय लगातार प्रभारी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है।
नई व्यवस्था नहीं होने से बढ़ रही बेचैनी
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि ऐसी स्थिति में कुलपति कार्यालय को नए प्रभारी कुलसचिव के लिए नाम प्रस्तावित कर राजभवन को भेजना चाहिए, ताकि प्रशासनिक और वित्तीय कार्य प्रभावित न हों। हालांकि अब तक प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से विश्वविद्यालय में असमंजस और असंतोष का माहौल बना हुआ है।
कर्मचारी और शिक्षक निर्णयहीनता से परेशान हैं। पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे पारदर्शिता की कमी महसूस की जा रही है। शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि जानकारी के अभाव में भ्रम और नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
वर्जन:
डॉ सलोमी कुजूर ने प्रभारी कुल सचिव के पद से इस्तीफा देने की पेशकस की है। लेकिन लेकिन उनके चिकित्सा अवकाश पर होने के कारण इस पर तत्काल निर्णय संभव नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है साथ ही पूरे मामले से राजभवन को अवगत करा दिया गया है। राजभवन का जो निर्देश होगा विवि उसके अनुसार कार्य करेगा।
प्रो. इला कुमार, वीसी, वीमेंस यूनिवर्सिटी

