बीजापुर : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक जनवरी से लापता स्वतंत्र पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ है। चंद्राकर ने अपनी रिपोर्टों के माध्यम से भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर किया था और उनकी हत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस इस मामले में कई संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है और मामले की गहन जांच कर रही है।
घटना का विवरण
मुकेश चंद्राकर NDTV के लिए स्वतंत्र पत्रकारिता करते थे। 1 जनवरी की रात अपने घर से लापता हो गए थे। उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट उनके भाई युकेश चंद्राकर ने पुलिस को दी थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और मुकेश की तलाश तेज कर दी। पुलिस को बाद में जानकारी मिली कि चंद्राकर का शव उसी क्षेत्र में स्थित एक सेप्टिक टैंक में मिला है, जहां उनकी आखिरी लोकेशन पाई गई थी। शव को बरामद करने के बाद, पुलिस ने उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और अब फोरेंसिक जांच की जा रही है।
भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग का प्रभाव
मुकेश चंद्राकर का काम भ्रष्टाचार की कड़ी आलोचना करने के लिए जाना जाता था। उन्होंने 22 दिसंबर को NDTV में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें बीजापुर के गंगालूर से नेलशनार तक बन रही सड़क के घटिया निर्माण को उजागर किया था। इस सड़क का निर्माण 120 करोड़ की लागत से किया जा रहा था, लेकिन इसमें कई गड्ढे थे और सड़क की गुणवत्ता बेहद खराब थी।
यह सड़क 52 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 40 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका था। रिपोर्ट के बाद इस मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों ने संज्ञान लिया और जगदलपुर लोक निर्माण विभाग ने मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई थी।
चंद्राकर की हत्या की आशंका इस तथ्य से भी जुड़ी है कि उन्होंने इस निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार को उजागर किया था। जांच में यह भी सामने आया है कि चंद्राकर ने ऐसे कई मामलों पर अपनी रिपोर्टिंग की थी, जिनसे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप जुड़ते थे।
हत्या की आशंका
मुकेश चंद्राकर की हत्या की आशंका इस कारण भी जताई जा रही है कि पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच में यह पता चला है कि आरोपियों ने उन्हें मारने के बाद शव को सेप्टिक टैंक में डाल दिया था। पुलिस ने मामले में आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की है और यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि क्या उनकी हत्या भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग की वजह से की गई थी।
पुलिस कार्रवाई और जांच
पुलिस ने शव को सेप्टिक टैंक से बाहर निकाल लिया है और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल फोरेंसिक जांच जारी है, जिससे मौत के कारणों का पता चल सके। मामले की जांच में तेजी लाई गई है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पत्रकार की हत्या के पीछे क्या मंशा थी।
जिले में इस हत्याकांड ने हड़कंप मचा दिया है। पत्रकारों और समाज के अन्य लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और न्याय की मांग की है। स्थानीय पत्रकार संगठन और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मामले में गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि पत्रकारों के खिलाफ हो रहे हमलों और हत्याओं पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मुकेश चंद्राकर की हत्या ने न केवल पत्रकारिता जगत को झकझोर दिया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सत्ता और प्रभाव के बड़े खेल में भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए खतरे कितने बढ़ सकते हैं। अब यह पुलिस के ऊपर है कि वे इस हत्याकांड की जांच करके दोषियों को सजा दिलवाते हैं और पत्रकारों के खिलाफ हो रहे हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।
चंद्राकर की मौत ने छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में यह सवाल उठाया है कि क्या हम अपनी स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा कर पा रहे हैं और पत्रकारों को उनके काम के लिए कितना सुरक्षित महसूस होता है।
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