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Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली में थमा चुनाव प्रचार, AI जनित और तीखे शब्दबाण बने हथियार

चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को "भारतीय झूठा पार्टी" और "गाली-गलौज पार्टी" के तौर पर पेश किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आप को "आप-दा" (आपदा) और अरविंद केजरीवाल को "घोषणा मंत्री" कहकर पलटवार किया।

by Reeta Rai Sagar
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सेंट्रल डेस्क। Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार सोमवार को शाम 5 बजे समाप्त हो गया। इसके साथ ही मतदान से पहले 48 घंटे की मौन अवधि शुरू हो गई। प्रचार के अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली भर में 22 रोड शो और रैलियों का आयोजन किया।

बीजेपी व आप लगा ने लगाया एड़ी-चोटी का जोर
बीते 25 साल से दिल्ली की गद्दी से बाहर रहने वाली बीजेपी इस बार सत्ता में आने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। वहीं, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) तीसरी बार अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए आश्वस्त है और इसके लिए वह अपनी मुफ्त कल्याण योजनाओं के शासन मॉडल पर भरोसा कर रही है। कांग्रेस, जिसने 2013 तक दिल्ली में 15 साल तक शासन किया, अब पिछली दो चुनावों में पूरी तरह से हारने के बाद अपनी खोई हुई जमीन को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है।

डिजिटल वार भी रहा जोरदार
यह चुनावी लड़ाई अभूतपूर्व तरीके से एआई -जनित स्पूफ, तीखे राजनीतिक कटाक्षों और जोरदार रोड शो के साथ एक सख्त मुकाबला बन चुकी है। चुनाव आयोग का मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (एमसीसी) कहता है कि सभी सार्वजनिक बैठकें, चुनाव संबंधित कार्य और प्रचार 48 घंटे पहले समाप्त हो जाने चाहिए। चुनाव आयोग के अनुसार, चुनावी प्रचार के दौरान सिनेमा, टीवी और प्रिंट मीडिया के माध्यम से प्रचार सामग्री का प्रसारण भी इस अवधि में प्रतिबंधित रहेगा।

किसी ने कहा ‘झूठा पार्टी’ तो कोई बताया गया ‘आपदा’
इस चुनाव में तीखे शब्दों के प्रहार किए, जिसमें पार्टियां जोरदार नारेबाजी और कटाक्ष कर रही हैं। आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को “भारतीय झूठा पार्टी” और “गाली-गलौज पार्टी” के तौर पर पेश किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आप को “आप-दा” (आपदा) और अरविंद केजरीवाल को “घोषणा मंत्री” कहकर पलटवार किया।

कटाक्ष में कांग्रेस भी नहीं रही पीछे
कांग्रेस ने केजरीवाल को “फर्जीवाल” और “छोटा रिचार्ज” के तौर पर पेश किया। ए.आई.-जनित मीम्स और डिजिटल प्रचार के प्रभाव से इस बार दिल्ली चुनावों में राजनीतिक संवाद का स्तर बहुत बदल चुका है। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के आंकड़ों के अनुसार, 5 फरवरी को 1.56 करोड़ मतदाता 13,766 मतदान केंद्रों पर मतदान करने के पात्र होंगे।

83.76 लाख पुरुष, 72.36 लाख महिला वोटर
कुल 1.56 करोड़ मतदाताओं में 83.76 लाख पुरुष, 72.36 लाख महिलाएं और 1,267 तीसरी लिंग के मतदाता हैं। विकलांग व्यक्तियों के लिए 733 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने पहली बार भारत में क्यू मैनेजमेंट सिस्टम (QMS) ऐप का शुभारंभ किया है, जिससे मतदाता मतदान केंद्रों पर वास्तविक समय में भीड़ की स्थिति को देख सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों और विकलांग व्यक्तियों के लिए घर पर मतदान की सुविधा 24 जनवरी से शुरू हुई थी, जिसके तहत 6,980 में से 7,553 पात्र मतदाताओं ने पहले ही मतदान किया है, और यह सुविधा 4 फरवरी तक जारी रहेगी।

शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव के लिए किए गए सख्त इंतजाम
कदाचारमुक्त और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स की 220 कंपनियां, 19,000 होम गार्ड और 35,626 दिल्ली पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा, 21,584 बैलेट यूनिट्स, 20,692 कंट्रोल यूनिट्स और 18,943 वीवीपैट तैयार किए गए हैं, जिसमें डमी और ब्रेल बैलेट पेपर का भी प्रावधान है।

2015 में, आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीतकर भाजपा को सिर्फ 3 और कांग्रेस को शून्य सीटों तक सीमित कर दिया था। 2020 में, आप ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की, भाजपा को 8 सीटें मिलीं, और कांग्रेस फिर से खाता खोलने में विफल रही।

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