सेंट्रल डेस्क : अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीयों के लिए एक नई चिंता की लकीर खींची जा रही है, खासतौर पर पंजाबियों के लिए। हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इमिग्रेशन जजों को बिना किसी पूर्व सूचना के बर्खास्त कर दिया, जिससे 14 लाख पंजाबी नागरिकों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडराने लगा है। यह कदम उन भारतीयों के लिए एक बड़ा झटका है जिन्होंने शरणार्थी दर्जे के लिए आवेदन किया था।
ट्रंप सरकार के इमिग्रेशन नीतियों का असर
अमेरिकी इमिग्रेशन प्रणाली को लेकर ट्रंप प्रशासन के फैसले ने अप्रत्याशित बदलाव लाए हैं। 20 इमिग्रेशन जजों की बर्खास्तगी ने उन 35 लाख लोगों के लिए चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने शरणार्थी के रूप में अमेरिका में रहने के लिए आवेदन किया था। इन जजों की बर्खास्तगी के कारण मामलों में और देरी होने की संभावना है, जिससे पंजाबी मूल के करीब 14 लाख लोगों के निर्वासन का खतरा और बढ़ सकता है। अमेरिका में रहने वाले राणा टुट का मानना है कि इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर पंजाबी युवाओं पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है और इसके परिणामस्वरूप, कई लोग अपने समुदायों में जड़ें जमाने की कोशिश करेंगे, जिससे उनका निर्वासन और मुश्किल हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन के कदम और उनका मकसद
ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य इमिग्रेशन मामलों को तेजी से निपटाने का था, जिसके तहत इमिग्रेशन जजों पर दबाव डाला गया था। पिछले महीने, अमेरिकी न्याय विभाग ने उन गैर-सरकारी संगठनों की वित्तीय सहायता रोक दी थी, जो निर्वासन का सामना कर रहे लोगों को कानूनी मदद प्रदान करते थे। ट्रंप प्रशासन के इन कदमों से यह साफ हो जाता है कि वे सामूहिक निर्वासन और संघीय सरकार के आकार को छोटा करने में रुचि रखते हैं, जो कि उनके प्रमुख लक्ष्य हैं।
कनाडा में भी इमिग्रेशन प्रणाली पर असर
अमेरिका में होने वाले इस बदलाव का असर केवल भारतीयों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि कनाडा में भी इमिग्रेशन प्रणाली में असर देखने को मिलेगा। कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (IRCC) ने अगले तीन वर्षों में अपने कर्मचारियों में 25% कटौती करने का ऐलान किया है। इस कदम से कनाडा में पीआर (पर्मानेंट रेजिडेंसी) प्रोसेस और भी धीमी हो सकती है, जिससे भारतीय नागरिकों को भी परेशानी हो सकती है। वर्तमान में कनाडा में 22 लाख आवेदन लंबित हैं, और यह संख्या आगे बढ़ने की संभावना है, जिससे इमिग्रेशन प्रक्रिया में और भी देरी हो सकती है।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया में देरी और पंजाबी युवाओं की चिंता
राणा टुट का कहना है कि इमिग्रेशन न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे मामलों में देर होने के कारण अवैध अप्रवासियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। हालांकि, इन मामलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटाने में समय लगता है, जिससे उन लोगों के लिए मुश्किलें पैदा हो रही हैं जो अमेरिकी समाज में जड़ें जमाना शुरू कर चुके हैं। अब, ट्रंप प्रशासन की नीतियों के कारण, इन लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरने के लिए मजबूर किया जाएगा, जिससे उनकी स्थिति और भी असमंजस में पड़ सकती है।
इस महीने डिपोर्ट हुए भारतीय
अमेरिका से डिपोर्ट होने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या भी बढ़ रही है। फरवरी में, 5 फरवरी को 104 भारतीयों में से 30 पंजाबी, 15 फरवरी को 116 भारतीयों में से 67 पंजाबी और 16 फरवरी को 112 भारतीयों में से 31 पंजाबी डिपोर्ट हुए। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि डिपोर्टेशन का सिलसिला तेज हो रहा है और यह भारतीयों के लिए एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। अमेरिका और कनाडा दोनों देशों में इमिग्रेशन प्रक्रिया में हो रहे बदलावों से भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की चिंताएं बढ़ रही हैं। ट्रंप प्रशासन की नीतियों और कर्मचारियों की कटौती के कारण, कई लोग डिपोर्टेशन के खतरे का सामना कर रहे हैं। ऐसे में, भारतीय समुदाय को इमिग्रेशन प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।

