Ranchi : लंबे अंतराल के बाद आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। रविवार को राज्यभर में हुई इस परीक्षा के दौरान ओड़िया और शिक्षा विषय के प्रश्नपत्रों को लेकर गंभीर गड़बड़ी सामने आई। प्रश्नपत्र पर्याप्त संख्या में केंद्रों तक नहीं पहुंच सके और जो पहुंचे, उनकी प्रिंटिंग भी साफ नहीं थी, जिससे अभ्यर्थियों को प्रश्न पढ़ने में दिक्कत हुई।
मामले की जानकारी मिलते ही झारखंड लोक सेवा आयोग ने त्वरित निर्णय लेते हुए दोनों विषयों की परीक्षा पूरे राज्य में रद्द कर दी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ओड़िया (कोड-023) और शिक्षा (कोड-009) विषय की परीक्षा नई तिथि पर कराई जाएगी, जिसकी सूचना बाद में दी जाएगी।
गौरतलब है कि रांची के शहीद चौक स्थित एएसटीवीएस डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और बोकारो के सेक्टर-9 स्थित सरदार पटेल पब्लिक स्कूल परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्रों की कमी और खराब प्रिंटिंग की समस्या सामने आई।
राज्य के छह जिलों रांची, बोकारो, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग और देवघर में कुल 430 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा एक ही पाली में दो पेपरों के साथ संपन्न हुई, जिसमें पहले पेपर में शिक्षण व शोध क्षमता, सामान्य अध्ययन और तर्कशक्ति, जबकि दूसरे पेपर में अभ्यर्थियों के वैकल्पिक विषय से जुड़े प्रश्न पूछे गए।
इस परीक्षा के माध्यम से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति के लिए पात्रता तय की जानी है, साथ ही पीएचडी में नामांकन का रास्ता भी इसी से खुलता है। गौरतलब है कि इससे पहले यह परीक्षा वर्ष 2007-08 में आयोजित हुई थी, जो उस समय भी विवादों में रही थी।
परीक्षा केंद्रों पर हंगामा
जहां प्रश्नपत्र नहीं पहुंचे, वहां अभ्यर्थियों को परीक्षा समाप्त होने तक केंद्र के अंदर ही रोके रखा गया। बाहर निकलने के बाद नाराज अभ्यर्थियों ने जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि आयोग की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। कई छात्र दूर-दराज जिलों से तेज गर्मी में परीक्षा देने पहुंचे थे, लेकिन परीक्षा ही नहीं दे सके।
प्रश्नपत्र के स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि एकाउंट्स, कॉमर्स और अंग्रेजी जैसे विषयों के प्रश्न अपेक्षाकृत कठिन थे। वहीं सामान्य अध्ययन के प्रश्नों को संतुलित और स्टैंडर्ड बताया गया। कुछ टाइपिंग त्रुटियों को छोड़कर अधिकांश प्रश्न ठीक पाए गए।
अब अभ्यर्थियों की नजर आयोग के अगले फैसले और नई परीक्षा तिथि पर टिकी हुई है।

