Seraikela : चांडिल प्रखंड के आसनबनी पंचायत स्थित जामडीह गांव में शनिवार को सेंदरा पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ श्रद्धा और उत्साह के माहौल में मनाया गया। दलमा बुरू सेंदरा देशुआ समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत लाया देवेन कर्मकार द्वारा इष्ट देवता की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई।
पूजा के दौरान ढोल-नगाड़ों और मांदर की गूंज के बीच ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ शामिल हुए और पूरे वातावरण में सांस्कृतिक आस्था की झलक देखने को मिली।
समिति के सचिव सत्य नारायण मुर्मू ने इस अवसर पर कहा कि सेंदरा पर्व आदिवासी समाज की अस्मिता, पहचान और सदियों पुरानी विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में हमारी परंपराएं कमजोर पड़ रही हैं, ऐसे में सेंदरा जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आगे बढ़कर अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
परंपरा के अनुसार, शनिवार को रात होने पर सेंदरा वीरों ने दलमा जंगल में प्रवेश किया। यहां बुरू बोंगा की पूजा-अर्चना के बाद सुबह वापसी होगी। समिति ने स्पष्ट किया कि यह पर्व शिकार नहीं, बल्कि प्रकृति पूजन और पूर्वजों के सम्मान का प्रतीक है।
कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष फकीर चंद्र सोरेन, उपाध्यक्ष गुरु चरण सिंह, रामगढ़ के ग्राम प्रधान कालीपोद सिंह, गणपति सिंह, फागू सोरेन, सत्य रंजन सोरेन, बृंदाबन सिंह, बलाई टुडू, सोम मांझी, सदानंद सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर इस आयोजन का हिस्सा बने।
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