नयी दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को मणिपुर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और अशांत राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने तथा अवैध और लूटे गए हथियारों को पुलिस के हवाले करने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया। यह बैठक राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद पहली बार हुई है।
सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री ने मणिपुर में सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया और राज्य में कानून-व्यवस्था की समग्र स्थिति पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। बैठक में मई 2023 से पहले जैसी स्थिति को बहाल करने और विभिन्न समूहों के पास मौजूद अवैध और लूटे गए हथियारों को पुलिस के पास सौंपने पर जोर दिया गया।
बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मणिपुर सरकार, सेना और अर्धसैनिक बलों के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। मई 2023 में इंफाल घाटी और कुकी-जो समुदाय के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए थे और हजारों लोग बेघर हो गए थे। इसके बाद राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई और मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद केंद्र सरकार ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया था।
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 20 फरवरी को लोगों से लूटे गए और अवैध हथियारों को स्वेच्छा से पुलिस को सौंपने का आग्रह किया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि इस अवधि में हथियार सौंपने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस अवधि में घाटी के जिलों में 300 से अधिक हथियार पुलिस को सौंपे गए, जिनमें मेइती चरमपंथी समूह अरम्बाई टेंगोल द्वारा सौंपे गए 246 आग्नेयास्त्र शामिल हैं।
राज्यपाल ने लूटे गए और अवैध हथियारों को सौंपने की समयसीमा को बढ़ाकर 6 मार्च शाम 4 बजे तक कर दी है।
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