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मोदी सरकार ने हर बार लिए कड़े फैसले, CAA से लेकर Waqf bill तक पर हुआ विरोध

मोदी सरकार की प्रोग्रेसिव सोच ने वक्त की जरूरत बताते हुए कई अधिनियम पारित कराए और उन्हें सख्ती से लागू किया। हालांकि इन फैसलों को लेकर व्यापक तौर पर बहस, समर्थन और विरोध होता रहा।

by Reeta Rai Sagar
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सेंट्रल डेस्क: मोदी सरकार बीते तीन कार्यकाल से केंद्र में सत्ता में है और हर बार जब भी कोई निर्णय देश या जनहित में लेने का समय आया, सरकार ने मजबूती से अपना पक्ष रखा और सख्ती से उसे लागू किया है। फिर चाहे वो ट्रिपल तलाक हो, नागरिकता संशोधन अधिनियम हो, यूनिफॉर्म सिविल कोड हो और अब वक्फ संसोधन बिल…। मुस्लिम समाज के भले के लिए कोई भी निर्णय लेने के लिए मोदी सरकार हमेशा से अडिग रही है।

हर बार मुस्लिम समुदाय के एक बड़े तबके ने इन बिलों को उनके मजहब और धार्मिक मामलों में सीधे तौर पर हमला बताया, लेकिन मोदी सरकार की प्रोग्रेसिव सोच ने इसे वक्त की जरूरत बताते हुए सख्ती से लागू किया। हालांकि इन फैसलों ने व्यापक तौर पर बहस, समर्थन और विरोध को ललकारा। 2019 में सत्ता में दोबारा वापसी होने पर सीएए सरकार का ऐसा फैसला रहा, जिसमें देश भर में व्यापक हिंसक प्रदर्शन हुए और कई जानें भी गईं।

तीन तलाक
तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 28 दिसंबर, 2017 को लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 पेश किया था। बीजेपी ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य तीन तलाक को अवैध घोषित करना था। यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें उनके पतियों द्वारा मनमाने ढंग से तलाक दिए जाने से बचाने के लिए था। विधेयक में ऐसा करने वाले पतियों के लिए 3 साल की सजा का भी प्रावधान तय किया गया। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद सरकार ने इसे अपराध की श्रेणी में लाने के लिए कानून बनाया और 2019 में यह कानून बना। तब मुस्लिम समाज ने आरोप लगाया कि यह मुसलमानों का घर तोड़ने की कवायद है।

नागरिकता संशोधन कानून
सीएए से मुस्लिम समुदाय सीधे तौर पर प्रभावित नहीं होता था, बावजूद इसके देश भर में इस बिल का तीव्र विरोध हुआ। उत्तर प्रदेश में इसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस को गोलीबारी करनी पड़ी थी। दिसंबर 2019 में पारित नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देना था। इस कानून के दायरे से मुस्लिमों को बाहर रखा गया। मुस्लिमों ने इसी को लेकर विरोध किया और इस कानून को विभाजनकारी और भेदभाव वाला बताया गया। 11 दिसंबर 2019 को सीएए संसद में पास हो गया।

यूनिफॉर्म सिविल कोड
इस बिल का जिक्र बीजेपी अपने घोषणा पत्र में भी करती आई थी। इसलिए यह बीजेपी के मुख्य एजेंडों में से एक था। बीजेपी शासित उत्तराखंड में UCC लागू हो गया है। गुजरात इस कानून को लागू करने की तैयारी में है। यूसीसी सभी धर्मों के लिए एक समान व्यक्तिगत कानून (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आदि) की बात करता है। सरकार का तर्क है कि यूसीसी से लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देगा। संविधान के अनुच्छेद 44 में भी इसका उल्लेख है।

वक्फ संशोधन बिल
इसे पहली बार अगस्त 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था। यह बिल वक्फ बोर्ड और उसकी संपत्तियों में सुधार के लिए है। केंद्र सरकार का तर्क है कि इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में भ्रष्टाचार और दुरुपयोग को रोकना है। साथ ही महिलाओं और पिछड़े मुस्लिमों को लाभ पहुंचाना भी है।

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