हजारीबाग: झारखंड के बड़कागांव से बानादाग कोल साइडिंग तक फैला एनटीपीसी (National Thermal Power Corporation) का एशिया का सबसे बड़ा कन्वेयर बेल्ट एक बार फिर सुर्खियों में है। इस परियोजना को लेकर स्थानीय रैयत, ट्रांसपोर्टर और ग्रामीण दो दिवसीय धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों की मुख्य मांग है कि कोयला ढुलाई फिर से हाईवा ट्रकों से कराई जाए।
बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी, बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि कन्वेयर बेल्ट के लगातार चलने से 24 घंटे तेज आवाज आती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, रात की नींद और बीमार बुजुर्गों का जीवन प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि एनटीपीसी को स्थानीय जनजीवन का ध्यान रखते हुए समाधान निकालना चाहिए।
ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान, हाईवा ट्रक हो रहे बेकार
एनटीपीसी की नई व्यवस्था के चलते पहले जहां 550 हाईवा ट्रक कोयला ढुलाई में लगे थे, अब अधिकांश ट्रकों को काम नहीं मिल रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कई गाड़ियां सिर्फ एक बार ही ढुलाई कर पा रही हैं। इससे EMI भरना मुश्किल हो गया है और ट्रक सड़कों पर खड़े रह जा रहे हैं।
NTPC ने दी सफाई, पर्यावरण के लिए जरूरी है कन्वेयर बेल्ट
एनटीपीसी के अनुसार, पर्यावरण और वन मंत्रालय के निर्देशों के तहत खदान से निकले कोयले को कन्वेयर बेल्ट से ले जाना अनिवार्य है। यह सिस्टम सड़क पर होने वाले प्रदूषण में कमी लाता है और स्थानीय पर्यावरण को संरक्षित करता है।
22 किलोमीटर लंबा कन्वेयर बेल्ट करेगा कोयला ढुलाई
एनटीपीसी के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 से 3 मिलियन मीट्रिक टन कोयला अस्थायी रूप से सड़क मार्ग से भेजा जाएगा, जबकि बाकी कोयला 22 किमी लंबी कन्वेयर बेल्ट से बानादाग कोल साइडिंग तक पहुंचाया जाएगा।
क्या होता है कन्वेयर बेल्ट
कन्वेयर बेल्ट का प्रयोग आमतौर पर इंडस्ट्रीज में किया जाता है। इसे जमीन से ऊंचाई पर लगे बेल्ट के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामग्री पहुंचाई जाती है। जमीन से ऊपर चक्के में चौड़ा बेल्ट रहता है जो दूसरी जगह लगे चक्के से जुड़ा रहता है। एक ओर से सामग्री इस बेल्ट पर डाली जाती रहती है और मूविंग होने के कारण बेल्ट की सामग्री को दूसरी ओर तक पहुंचाया जाता है।

