रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को झारखंड मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक आयोजित की गई। जिसमें कुल 10 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों में जल संसाधन प्रबंधन, शिक्षा, न्यायिक सेवा, स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक सुधार से जुड़े निर्णय शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण फैसला राज्य में झारखंड जल संसाधन आयोग के गठन को लेकर लिया गया। जल संसाधन विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, राज्य में दो वर्षों की अवधि के लिए एक जल संसाधन आयोग गठित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य राज्य में जल की उपलब्धता, उसका संरक्षण, सतत उपयोग तथा नीति निर्धारण में सहयोग देना होगा। आयोग के अध्यक्ष राज्य के विकास आयुक्त होंगे, जबकि जल संसाधन विभाग के सचिव कार्यकारी समिति के सचिव बनाए जाएंगे। आयोग में तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।

सरकारी स्कूलों में मिलेगी मासिक पत्रिका
इस बैठक में शिक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए भी अहम निर्णय लिए गए। राज्य के अल्पसंख्यक, मदरसा और संस्कृत विद्यालयों में कक्षा 9वीं और 10वीं में पढ़ने वाले 41,755 छात्रों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें और कॉपियां देने की योजना को मंजूरी दी गई। जिस पर वार्षिक 4.84 करोड़ का खर्च अनुमानित है। इसके अलावा सरकारी विद्यालयों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को विज्ञान विषय पर आधारित मासिक पत्रिका और कक्षा 11वीं-12वीं के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष मासिक पत्रिका देने का निर्णय लिया गया।
झारखंड मैनपावर आउटसोर्सिंग रेगुलेशन नीति मंजूर
राज्य सरकार ने झारखंड मैनपावर आउटसोर्सिंग रेगुलेशन नीति को भी स्वीकृति दी है। इस नीति के तहत आउटसोर्स कर्मियों को न्यूनतम 5 वर्षों की सेवा, उसके बाद 3 वर्ष का विस्तार, वार्षिक 3% वेतन वृद्धि, न्यूनतम वेतन की अनिवार्यता, ग्रुप एक्सीडेंटल इंश्योरेंस और आरक्षण नीति का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा। न्यायिक सेवा क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके तहत झारखंड वरीय न्यायिक सेवा में श्री विकेश को जिला न्यायाधीश के पद पर सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्त करने की स्वीकृति दी गई। इसी प्रकार, दो लिपिकों को क्षेत्रीय संवर्ग से सचिवालय सेवा संवर्ग में स्थानांतरित करते हुए नई नियुक्तियों को मंजूरी दी गई। स्वास्थ्य क्षेत्र में चतरा जिले के ईटखोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण के लिए गबन की गई राशि की वसूली की प्रत्याशा में 22 लाख से अधिक की राशि पुनः आवंटित की गई। वहीं, भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के दो रिपोर्टों को झारखंड विधानसभा के आगामी सत्र में प्रस्तुत करने की स्वीकृति भी दी गई।

