Home » Jamshedpur Muharram : आशूरा पर लौहनगरी में मातमी जुलूस व मजलिसों के साथ मना गम का दिन, जंग के मैदान की हुई मंजरकशी

Jamshedpur Muharram : आशूरा पर लौहनगरी में मातमी जुलूस व मजलिसों के साथ मना गम का दिन, जंग के मैदान की हुई मंजरकशी

by Mujtaba Haider Rizvi
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jamshedpur Muharram : लौह नगरी जमशेदपुर में रविवार को मुहर्रम के आशूरा का दिन पूरी अकीदत और एहतेराम के साथ मनाया गया। दिन भर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए मजलिस, मातमी जुलूस, अखाड़ा प्रदर्शन और फातेहा खानी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। शहर की गलियों में गम का माहौल रहा और हर तरफ “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं।

सुबह साकची के हुसैनी मिशन इमामबाड़े से मातमी जुलूस निकाला गया, जिसमें मर्सिया पढ़ा गया – “आज शब्बीर पर क्या आलम ए तन्हाई है”। यह जुलूस साकची गोलचक्कर तक गया और फिर वापसी में इमामबाड़े पर समाप्त हुआ। मानगो के जाकिर नगर मस्जिद में सुबह साढ़े नौ बजे आमाल-ए-आशूरा की नमाज अदा की गई, जबकि साकची में अस्र के वक्त ज़ियारत-ए-आशूरा की हुई।

मगरिब की नमाज के बाद साकची हुसैनी मिशन और मानगो के ज़ाकिर नगर इमामबाड़े में शाम-ए-गरीबां की मजलिस हुई। इसमें इमाम हुसैन की शहादत के बाद के हालात बयां किए गए। बताया गया कि कैसे कर्बला की तपती रेत पर हुसैन को शहीद करने के बाद उनके खैमे जला दिए गए, सामान लूट लिया गया और औरतों-बच्चों को कैद कर लिया गया। यह मंजर सुनकर मजलिस में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। रात को ज़ाकिर नगर इमामबाड़े में कर्बला के जंग के मैदान की मंज़र कशी की गई।

उधर, साकची, मानगो, जुगसलाई और धतकीडीह में अखाड़ा जुलूस निकाले गए। इन जुलूसों में युवाओं ने पारंपरिक हथियारों और करतबों के साथ मातम पेश किया। देर रात तक साकची और बिष्टुपुर स्थित कर्बला में फातेहा खानी का सिलसिला चलता रहा।

हुसैनी मिशन साकची के रईस रिजवी उर्फ़ छब्बन ने बताया कि इस अवसर पर 51 डेग खिचड़ा और शर्बत सभी धर्मों के लोगों के बीच तकसीम किया गया। उन्होंने कहा कि यह दिन सिर्फ मातम का ही नहीं, बल्कि इंसानियत और बलिदान की सीख का भी दिन है।

Read also – Jamshedpur Muharram : मुहर्रम को लेकर जमशेदपुर में ट्रैफिक प्लान में बदलाव, भारी वाहनों के परिचालन पर आंशिक प्रतिबंध

Related Articles