गिरिडीह : गिरिडीह जिले में नेशनल हाईवे 114ए के किनारे एक बार फिर भू-धंसान की घटना सामने आई है। यह घटना शुक्रवार देर शाम बिट्टा गढ़ा और गिरिडीह स्टेडियम के बीच घटी, जहां हाईवे के किनारे गोफ बन गया। बताया गया कि गोफ बनने की सूचना मिलते ही सीसीएल गिरिडीह परियोजना पदाधिकारी गोपाल सिंह मीणा ने स्थल का निरीक्षण किया और तुरंत भराई का कार्य शुरू कराया गया।
हर साल एक ही स्थान पर भू-धंसान, सड़क भी धंसी
भू-धंसान का यह इलाका गिरिडीह डीएवी पब्लिक स्कूल के बगल में स्थित है और मुफ्फसिल थाना से लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर है। पिछले डेढ़ दशक से इस क्षेत्र में लगातार भू-धंसान की घटनाएं हो रही हैं। वर्ष 2023 में भी इसी स्थान पर सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया था। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक ही स्थान पर बार-बार ऐसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।
Giridih News : अवैध कोयला खनन से खोखली हो रही ज़मीन
जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर बार-बार जमीन धंस रही है, वहां लंबे समय तक अवैध कोयला खनन होता रहा है। खनन माफिया मौका मिलते ही भूमिगत सुरंगों के माध्यम से कोयला निकालते रहे, जिससे भूमि की आंतरिक संरचना कमजोर हो गई। यह अवैध खनन ही भू-धंसान का मुख्य कारण माना जा रहा है।
सीसीएल व प्रशासन ने शुरू किया भराव कार्य
घटना की जानकारी मिलते ही सीसीएल के जीएम व परियोजना पदाधिकारी के निर्देश पर गोफ को पत्थरों से भरने का कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो यह क्षेत्र भविष्य में बड़े हादसे की चपेट में आ सकता है।
Giridih News : नेशनल हाईवे प्राधिकरण की उदासीनता पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने नेशनल हाईवे प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इतने वर्षों से एक ही स्थान पर भू-धंसान की घटनाएं होती आ रही हैं, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो किसी दिन यह क्षेत्र गंभीर सड़क दुर्घटना का कारण बन सकता है।
भू-वैज्ञानिक सर्वे और स्थायी समाधान की जरूरत
इस प्रकार की लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाएं संकेत देती हैं कि इस क्षेत्र की भूमि संरचना अत्यंत कमजोर हो चुकी है। भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आधार पर स्थायी इंजीनियरिंग समाधान अपनाना अत्यावश्यक है, जिससे भविष्य में होने वाले खतरे से बचा जा सके।

