RANCHI: खून को न तो किसी लैब में तैयार किया जा सकता है न ही ये किसी दुकान में मिलती है। ये बस मिलती है तो ब्लड बैंक से। जहां पर लोगों को ब्लड डोनेट करना होता है। लेकिन लोग ब्लड डोनेशन में इंटरेस्ट नहीं दिखा रहे है। ऐसे में विभाग ने ब्लड डोनेशन को बढ़ाने के लिए पूरा जोर लगा दिया है। इतना ही नहीं इसके लिए अभियान चलाया जा रहा है ताकि लोगों को ब्लड डोनेशन को लेकर जागरूक किया जा सके। इसके अलावा डोनर्स को दिए जाने वाले सप्लीमेंट की राशि भी बढ़ा दी गई है। जिससे कि डोनर्स को भरपूर सप्लीमेंट दिया जा सके।
1316 मरीज है रजिस्टर्ड
हॉस्पिटल में झारखंड के अलावा बिहार और कुछ अन्य राज्यों के भी थैलेसीमिया से ग्रसित मरीज रजिस्टर्ड है। इनमें से ज्यादातर मरीजों को हफ्ते में दो दिन ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है। जबकि कुछ मरीज हफ्ते में एक बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए आते है। लेकिन डिमांड की तुलना में सप्लाई कम है। अब तो सरकार ने बिना रिप्लेसमेंट के खून उपलब्ध कराने का निर्देश ब्लड बैंकों को दिया है।
हर दिन 60 यूनिट की डिमांड
सदर हॉस्पिटल रांची में डे केयर सेंटर बनाया गया है। जहां पर थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया से ग्रसित बच्चे ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए आते है। हर दिन 20-25 बच्चों को खून की जरूरत होती है। इसके अलावा हॉस्पिटल में भी 30-35 यूनिट की डिमांड आ रही है। ऐसे में किसी तरह मरीजों को खून तो उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन ब्लड डोनेशन कैंप में इस तुलना में खून कलेक्ट नहीं हो पा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि खुद से कैंप में आकर ब्लड डोनेट करे। जिससे कि जरूरतमंदों को बिना किसी रिप्लेसमेंट के खून मिल सके।
पांच चीजें दी जा रही डोनर्स को
ब्लड बैंकों में डोनर्स को पहले 25 रुपये का सप्लीमेंट दिया जाता था। जिसमें जूस, चॉकलेट और पानी दिया जाता था। अब डोनर्स को 50 रुपये का सप्लीमेंट दिया जा रहा है। जिसमें फ्रूटी, चॉकलेट, बिस्किट, मिक्सचर और पानी देने का प्रावधान किया गया है। डोनर्स में जागरूकता बढ़ाने में इसे अहम माना जा रहा है। चूंकि पहले डोनर्स इस वजह से भी नहीं आना चाहते थे कि उन्हें सप्लीमेंट के नाम पर केवल जूस और पानी मिलता था।
ब्लड बैंक सदर हॉस्पिटल की इंचार्ज डॉ रंजू ने बताया कि कैंप तो लगाए जा रहे है लेकिन जो डिमांड है उसकी तुलना में सप्लाई कम है। हमारा फोकस है कि ज्यादा से ज्यादा डोनर्स कैंप में आए तो स्टॉक में ज्यादा यूनिट रहेगा। वालेंट्री डोनेशन के लिए लोगों को जागरूक कर रहे है ताकि लोग खुद से तीन महीने के अंतराल पर आकर ब्लड डोनेट करें। टेस्ट कराने के बाद ही हम ब्लड लोगों को उपलब्ध करा रहे है।

