RANCHI: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में लंबे समय से चली आ रही दवाओं की कमी की समस्या अब जल्द खत्म होने की उम्मीद है। प्रबंधन ने दवाओं की रेगुलर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस टेंडर के तहत एक साल के लिए चयनित एजेंसी से दवाओं की सप्लाई का कांट्रैक्ट किया जाएगा, जिससे मरीजों को समय पर जरूरी दवाएं मिल सकेंगी। बता दें कि रिम्स में झारखंड के अलावा बंगाल, ओडिशा और यूपी से भी लोग इलाज के लिए पहुंचते है। ऐसे में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
हर दिन ओपीडी में 2 हजार मरीज
रिम्स राज्यभर के मरीजों के लिए इलाज का प्रमुख केंद्र है। यहां रोजाना काफी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि रिम्स के इनडोर वार्ड में हर समय 1500 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं, जबकि ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 2000 मरीज इलाज के लिए आते हैं। वहीं इमरजेंसी में भी 250-300 मरीजों का आना लगा रहता है। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के बावजूद अस्पताल में दवाओं की कमी रहती है। इसका सीधा असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है।
डिस्पेंसरी में गिनती की दवाएं
हॉस्पिटल की डिस्पेंसरी में एक दर्जन दवाएं उपलब्ध है। दवाओं की कमी के कारण कई बार डॉक्टरों द्वारा लिखी गई जरूरी दवाएं मरीजों को नहीं मिल पाती हैं। ऐसे में इलाजरत मरीजों के परिजनों को मजबूरी में बाहर की प्राइवेट मेडिकल दुकानों से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। जिससे मरीजों की जेब पर भी असर पड़ता है। चूंकि प्राइवेट स्टोर से मिलने वाली दवाएं काफी महंगी होती है। कई बार इसका फायदा दलाल भी उठाते है। अपनी सेटिंग वाली दुकानों से परिजनों को दवा खरीदवाते है।
डिमांड के अनुसार करनी होगी सप्लाई
दवा सप्लाई के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जहां शर्त रखी गई है कि मरीजों की जरूरत के अनुसार दवा सप्लाई करनी होगी। डिमांड की स्थिति में तत्काल दवा भेजनी होगी। यह सुनिश्चित करना होगा कि मरीजों का इलाज दवा के अभाव में न रूके। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी अस्पताल की जरूरत के अनुसार सभी जरूरी दवाओं की आपूर्ति करेगी। यह कांट्रैक्ट एक साल के लिए होगा, ताकि लंबे समय तक दवाओं की कमी न हो और मरीजों को राहत मिल सके।
रिम्स प्रशासन के अनुसार टेंडर में यह शर्त रखी गई है कि एजेंसी समय पर और तय मानकों के अनुसार दवाओं की आपूर्ति करेगी। किसी भी तरह की लापरवाही या देरी होने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी किया जाएगा। इससे दवा सप्लाई सिस्टम में पारदर्शिता और जिम्मेदारी दोनों सुनिश्चित होंगी। रिम्स में आवश्यक दवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगी। इससे न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि डॉक्टरों को भी इलाज में आसानी होगी।
हाईलाइट्स
- दवा की सप्लाई के लिए प्रबंधन ने निकाला टेंडर
- एक साल के लिए एजेंसी से साइन होगा कांट्रैक्ट
- इनडोर में एडमिट रहते है 1500 से अधिक मरीज
- ओपीडी में भी हर दिन आते है 2000 के लगभग मरीज
- डिस्पेंसरी में उपलब्ध है मात्र एक दर्जन दवाएं
- इलाजरत मरीजों के परिजन भी बाहर से लाते है दवा

