रांची : झारखंड के सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक अहम बदलाव होने जा रहा है। राज्य का स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग जल्द ही ऐसा आदेश जारी कर सकता है, जिसके तहत शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करनी होगी।
जानकारी के अनुसार, विभाग इस संबंध में अंतिम स्तर पर विचार कर रहा है। उच्च अधिकारियों की सहमति मिलने के बाद औपचारिक आदेश जारी किया जा सकता है। लंबे समय से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था, इसलिए राज्य सरकार किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले अदालत के अंतिम रुख का इंतजार कर रही थी।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी विभिन्न राज्यों और शिक्षक संगठनों की पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इसके बाद अब झारखंड सरकार भी अदालत के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करने की तैयारी में है।
दरअसल, शिक्षा विभाग ने इस संभावना को देखते हुए झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली-2026 में पहले ही एक प्रावधान शामिल कर लिया था। इस नियम के तहत वर्तमान में कार्यरत प्रारंभिक शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई है। यानी शिक्षकों के लिए परीक्षा देने का रास्ता पहले से ही खुला हुआ है।
अब विभाग की ओर से आदेश जारी होने के बाद पुराने शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। हालांकि, परीक्षा कब होगी और शिक्षकों को कितनी अवधि दी जाएगी, इस संबंध में अंतिम निर्णय आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था, तब झारखंड के कई शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से भी पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की थी। लेकिन शिक्षा विभाग ने अदालत के फैसले का इंतजार करना ही उचित समझा। सरकार ने न तो कोई नई कानूनी चुनौती दी और न ही तत्काल कोई आदेश जारी किया।
इधर, सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद भी कुछ शिक्षक संगठन अपने कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। वहीं शिक्षा विभाग अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी में जुट गया है।

