RANCHI: झारखंड सशस्त्र पुलिस-1 (जैप-1) ने अपना 146वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। मुख्य अतिथि डीजीपी तदाशा मिश्रा ने जैप-1 के 144वें स्थापना दिवस के साथ आनंद मेला का उद्घाटन किया। इस मेले में झूले और 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें नेपाल, दार्जिलिंग, सिक्किम और देहरादून के सामान प्रदर्शित किए गए हैं। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने जैप-1 के गौरवपूर्ण इतिहास का उल्लेख किया और जवानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जैप-1 ने विश्व युद्ध से लेकर अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं में विशेष योगदान दिया है। इसके साथ ही उन्होंने जवानों के लिए रिवॉर्ड की व्यवस्था और रिक्तियों को भरने की घोषणा की। साथ ही बताया कि क्वार्टर की सुविधा पर भी विचार किया जा रहा है।

परेड में शामिल हुए चार प्लाटून
इससे पहले स्थापना दिवस के अवसर पर डोरंडा स्थित जैप-1 में भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। जहां वरिष्ठ अधिकारी और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत डीजीपी तदाशा मिश्रा ने शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद जैप-1 के जवानों ने अनुशासन, एकता और शौर्य का परिचय देते हुए भव्य परेड प्रस्तुत की। परेड में चार प्लाटूनों ने हिस्सा लिया। जिनकी कदमताल और ड्रिल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। परेड के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें जवानों की प्रतिभा और झारखंड की संस्कृति की झलक देखने को मिली।
भारत की सबसे प्राचीन वाहिनी
रांची के एसएसपी और जैप-1 समादेष्टा राकेश रंजन ने वाहिनी का परिचय देते हुए बताया कि यह भारत की सबसे प्राचीन वाहिनी है। जिसकी स्थापना जनवरी 1880 में न्यू रिजर्व फोर्स के रूप में हुई थी। इसके उत्कृष्ट और वीरतापूर्ण कार्यों के लिए भारत सरकार द्वारा इसे पूर्वी सितारा पदक से सम्मानित किया जा चुका है। झारखंड राज्य गठन के बाद जैप-1 के 13 पुलिसकर्मी उग्रवादी विरोधी कार्रवाई में शहीद हुए हैं।

