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Palamu Elephant Case : पलामू में हथिनी चोरी का रहस्य, अब अदालत में तय होगा असली मालिक कौन

Palamu Elephant Case : सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर 7 अक्टूबर को सदर थाना में पेश होने को कहा गया है।

by Mujtaba Haider Rizvi
Elephant ownership dispute case in Palamu reaches court
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Palamu : झारखंड के पलामू जिले में सामने आया हथिनी चोरी का मामला अब पूरी तरह पलट चुका है। जो केस पहले झारखंड के इतिहास में पहली हथिनी चोरी के रूप में दर्ज हुआ था, वह दरअसल एक सुनियोजित धोखाधड़ी और पार्टनरशिप विवाद निकला। पलामू पुलिस की गहन तकनीकी जांच और मुखबिरों की सूचना के बाद हथिनी को बिहार के छपरा जिले से बरामद कर लिया गया था। पुलिस का कहना है कि अब अदालत में यह तय होगा कि हथिनी का असली मालिक कौन है ? हथिनी को आखिर किसके सुपुर्द किया जाए।

मामले की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई थी, जब उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर निवासी नरेंद्र कुमार शुक्ला ने मेदिनीनगर सदर थाना में अपनी हथिनी चोरी होने की एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने दावा किया था कि हथिनी की कीमत करीब एक करोड़ रुपये है। नरेंद्र कुमार शुक्ला के अनुसार, 11 अगस्त को चारे की कमी के कारण वे हथिनी को लेकर पलामू पहुंचे थे और महावत के भरोसे छोड़ दिया था। 13 अगस्त को लौटने पर हथिनी गायब मिली।

जांच में बड़ा खुलासा

पुलिस ने 17 दिनों तक तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और मुखबिरों की मदद से जांच की। इस दौरान हथिनी को बिहार के छपरा जिले के अमनौर थाना क्षेत्र से बरामद किया गया, जहां इसे पहाड़पुर निवासी गोरख सिंह को 27 लाख रुपये में बेच दिया गया था। फिलहाल हथिनी को गोरख सिंह के पास जिम्मानामा पर रखा गया है।

चोरी नहीं, पार्टनरशिप में धोखा

जांच में सामने आया कि नरेंद्र कुमार शुक्ला हथिनी के असली मालिक नहीं थे, बल्कि वे मिर्जापुर निवासी संगम राज तिवारी की हथिनी के देखभालकर्ता थे। हथिनी को चार पार्टनरों ने मिलकर करीब 40 लाख रुपये में खरीदा था, लेकिन बाद में तीन पार्टनरों ने आपस में मिलकर एक पार्टनर को धोखा दिया और महावत के जरिए हथिनी को बेच दिया।

पुलिस के अनुसार, पलामू से हथिनी को पैदल बिहार के गोपालगंज तक ले जाया गया, फिर ट्रक से छपरा के अमनौर पहुंचाया गया। जिस महावत की भूमिका संदिग्ध है, वह फिलहाल फरार है।

सिविल विवाद, अदालत तय करेगी मालिकाना हक

पलामू एसपी रीष्मा रमेशन ने बताया कि यह मामला अब आपराधिक से अधिक सिविल प्रकृति का है और हथिनी के वास्तविक स्वामित्व का फैसला अदालत करेगी। सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर 7 अक्टूबर को सदर थाना में पेश होने को कहा गया है। उत्तर प्रदेश में भी इस मामले से जुड़ी एक अलग एफआईआर दर्ज की गई है।

यह पूरा मामला झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़ा है और हाथियों की खरीद-फरोख्त व प्रतिबंधित व्यावसायिक उपयोग जैसे गंभीर सवाल खड़े करता है।

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