रांची: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मंगलवार को षष्ठम झारखंड विधानसभा के पंचम बजट सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता गरीबों के दुख-दर्द को दूर करना, सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना और झारखंड को आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में तैयार यह बजट राज्य के गरीबों के आँसू पोंछने के साथ-साथ आम लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला साबित होगा। यह बजट समावेशी, सतत और जनकल्याणकारी विकास को समर्पित है तथा राज्य की आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है, जिसकी पहचान उसकी आदिवासी संस्कृति, सामुदायिक जीवन मूल्यों और प्रकृति के साथ सामंजस्य की परंपरा से है। अलग राज्य बनने का उद्देश्य असमानता को दूर करना, आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा करना और संसाधनों का संतुलित एवं जनहितकारी उपयोग सुनिश्चित करना था। सरकार इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अपने भाषण में उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर), रजरप्पा मंदिर, अंजनी धाम, पलामू किला, पारसनाथ पहाड़ी, जामा मस्जिद, राजमहल, जेल चर्च, रांची, श्री गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा, साहिबगंज, मैथन डैम और तिलैया डैम जैसे स्थलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये स्थल झारखंड को राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाते हैं।
वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार पर बकाया राशि नहीं देने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, संवैधानिक प्रावधानों के तहत मिलने वाली राशि राज्य को समय पर नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न मदों में करीब 11 हजार करोड़ रुपये, केंद्रीय कर मद में लगभग 5 हजार करोड़ रुपये तथा अन्य देय मदों सहित कुल मिलाकर सवा लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि अब तक झारखंड को प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी के युक्तिकरण से राज्य को लगभग 4 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं, मनरेगा की नई व्यवस्था से अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ने की बात भी उन्होंने कही। सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य सरकार विकास कार्यों को जारी रखे हुए है और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी गई है।
वित्त मंत्री ने बताया कि बजट तैयार करने से पहले कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, आम जनता, विशेषज्ञों, बैंकरों और विभिन्न विभागों से सुझाव लिए गए। उन्होंने इस बजट को “आइडिया बजट” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों, बेरोजगार युवाओं, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार अपने घोषणा पत्र में किए गए वादों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और झारखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।

