Ramgarh : जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए एक लंबे समय से लंबित विवाद का शनिवार को समाधान हो गया। भैरवा जलाशय परियोजना से जुड़े विस्थापितों का लगभग 30 सालों से चल रहा मामला आपसी समझौते के आधार पर सुलझा लिया गया। इससे सैकड़ों प्रभावित परिवारों को राहत मिली है।
झालसा के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) द्वारा व्यवहार न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत में कुल 10,188 मामलों का निपटारा किया गया। इनके लिए 12 करोड़ 2 लाख 79 हजार 641 रुपये की समझौता राशि तय की गई है।
डालसा के सचिव अनिल कुमार ने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन के मार्गदर्शन में आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत में भैरवा जलाशय परियोजना से जुड़े 300 से अधिक मामले लगभग तीन दशक से लंबित थे। इनमें से 172 मामलों की सुनवाई कर आपसी सहमति से उनका समाधान कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत में केवल जलाशय विस्थापन से जुड़े मामलों का ही निपटारा नहीं हुआ, बल्कि पारिवारिक विवाद, विद्युत अधिनियम से जुड़े मामले, भूमि अधिग्रहण विवाद, सिविल और आपराधिक अपील, बैंक और बीमा से जुड़े मामले, राजस्व संबंधी मामले, चेक बाउंस और मोटर वाहन दावा मामलों का भी समाधान किया गया।लोक अदालत वैकल्पिक विवाद समाधान की एक प्रभावी प्रक्रिया है, जहां मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया जाता है। इससे पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है और न्यायालय शुल्क की भी बचत होती है। साथ ही इससे दोनों पक्षों के बीच संबंधों में सुधार होता है और न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय व संसाधनों की भी बचत होती है।
गठित की गई थीं सात बेंचें
राष्ट्रीय लोक अदालत के संचालन के लिए कुल सात बेंचों का गठन किया गया था। पहली बेंच में जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विशाल श्रीवास्तव और अधिवक्ता नितेश कुमार शामिल थे। दूसरी बेंच में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार राम और अधिवक्ता अमरनाथ बंका मौजूद थे। तीसरी बेंच में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संदीप कुमार बर्तम और अधिवक्ता अमरनाथ बंका शामिल थे। चौथी बेंच में सिविल जज द्वितीय संजीबिता गुईं और अधिवक्ता बीबी जाहिदा खातून मौजूद रहीं। पांचवीं बेंच में अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी हर्षित तिवारी शामिल थे। छठी बेंच में स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष प्रदीप कुमार चौरसिया और अधिवक्ता विघ्नेश दुबे मौजूद थे, जबकि सातवीं बेंच में कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला, सदस्य कुमारी नीना सिंह और अधिवक्ता जितेंद्र कुमार शामिल थे।राष्ट्रीय लोक अदालत में इतने बड़े पैमाने पर मामलों के निपटारे से न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम हुआ, बल्कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को भी राहत मिली।

